मुंबई। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट क्रांति को लेकर यह बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खबर है। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो को भारत के स्पेस रेगुलेटर इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) से अपने महत्वाकांक्षी 1,600 LEO सैटेलाइट नेटवर्क के लिए टेक्निकल मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी के साथ ही भारत अब एलन मस्क की ‘स्टारलिंक’ और अमेज़न की ‘प्रोजेक्ट कुइपर’ जैसी वैश्विक कंपनियों को टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

IN-SPACe, इसरो और दूरसंचार विभाग ने मिलकर जियो के इस प्रस्ताव का बारीकी से मूल्यांकन किया है! इसे “तकनीकी रूप से पूरी तरह मजबूत” पाया है। इस प्रोजेक्ट के तहत जियो अंतरिक्ष में धरती की निचली कक्षा में लगभग 1,600 से 1,650 छोटे सैटेलाइट्स तैनात करेगा।
यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा सैटेलाइट नेटवर्क होगा, जो पूरे देश में 4.5 से 5 Tbps की कुल क्षमता प्रदान करेगा। इस नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए रिलायंस जियो देश भर में 20 से 22 ग्राउंड स्टेशन स्थापित करेगा।
जियो का यह स्वदेशी नेटवर्क विदेशी प्रतिद्वंदियों के मुकाबले काफी दमदार नजर आ रहा है। जियो का यह नेटवर्क Direct-to-Device (D2D) तकनीक पर काम करेगा। यानी आपको अपने घर की छत पर स्टारलिंक की तरह कोई महंगी छतरी या डिश लगाने की जरूरत नहीं होगी। सीधे आपके स्मार्टफोन में सैटेलाइट से सिग्नल आएंगे।
पहाड़ों, घने जंगलों, दूर-दराज के गांवों, समुद्री इलाकों या सीमावर्ती क्षेत्रों में-जहां मोबाइल टावर या फाइबर केबल नहीं पहुंच सकते, वहां भी जियो स्पेस से सुपरफास्ट इंटरनेट पहुंचाएगा। जैसा कि जियो ने 4G और 5G के समय किया था, उम्मीद की जा रही है कि वह सैटेलाइट इंटरनेट की कीमतों को भी बेहद आक्रामक और आम भारतीयों के बजट के अनुकूल रखेगा।
यह भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी (Homegrown) LEO सैटेलाइट नेटवर्क होगा। सरकार इन सैटेलाइट्स पर डिफेंस पेलोड (सैन्य उपकरण/सेंसर) लगाने पर भी विचार कर रही है, जिससे विदेशी कंपनियों पर हमारी निर्भरता खत्म होगी। रणनीतिक सुरक्षा मजबूत होगी।
IN-SPACe से यह टेक्निकल क्लीयरेंस मिलने के बाद अब भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन के साथ तालमेल बिठाकर जियो को अंतरिक्ष में ऑर्बिटल स्लॉट और राइट्स दिलाने में मदद करेगी। यह प्रोजेक्ट एक बहुत बड़ा तकनीकी और वित्तीय निवेश है, जिसे पूरी तरह जमीन (या कहें अंतरिक्ष) पर उतरने में अगले 2 से 3 साल का समय लग सकता है।
यहां सीधे पढ़ें खबरें
खबरें और भी हैं। इसे आप अपने न्यूज वेब पोर्टल dainikbharat24.com पर सीधे भी जाकर पढ़ सकते हैं। नोटिफिकेशन को अलाउ कर खबरों से अपडेट रह सकते हैं। साथ ही, सुविधा के मुताबिक अन्य खबरें भी पढ़ सकते हैं।
आप अपने न्यूज वेब पोर्टल से फेसबुक, इंस्टाग्राम, X, स्वदेशी एप arattai सहित अन्य सोशल मीडिया पर भी जुड़ सकते हैं। खबरें पढ़ सकते हैं। सीधे गूगल हिन्दी न्यूज पर जाकर खबरें पढ़ सकते हैं। अपने सुझाव या खबरें हमें dainikbharat24@gmail.com पर भेजें।
हमारे साथ जुड़ें
व्हाट्सएप ग्रुप
https://chat.whatsapp.com/H5n5EBsvk6S4fpctWHfcLK
स्वदेशी एप ग्रुप
https://chat.arattai.in/groups/t43545f313238383036363337343930333731343936395f32303030323937303330392d47437c3031303131353032363138323137353934323036313934393230

