नई दिल्ली। शुक्रवार को बड़ी खबर सुप्रीम कोर्ट से आई है। झारखंड सहित अन्य राज्यों, शिक्षक संगठनों और व्यक्तिगत शिक्षकों की ओर से दाखिल की गईं 60 से अधिक समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाते हुए अधिकांश याचिकाएं खारिज कर दीं।
न्यायालय ने शिक्षकों के भविष्य और बच्चों की शिक्षा के व्यावहारिक पहलुओं को देखते हुए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट उत्तीर्ण करने की पिछली समय सीमा को बढ़ा दिया है। इस आदेश का असर झारखंड के करीब चालीस हजार प्राइमरी शिक्षकों पर पड़ेगा।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि सेवारत शिक्षकों के लिए टेट पास अनिवार्य होना संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
कोर्ट ने पहले के फैसले (अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र सरकार) में दिए गए दो साल के समय को बढ़ाते हुए अब तीन साल का समय दिया है।
इसका मतलब है कि जिन शिक्षकों के पास पांच साल से अधिक की सेवा शेष है, उन्हें अब 31 अगस्त, 2028 तक टेट उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। पहले यह समय सीमा 31 अगस्त, 2027 थी।
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