रांची। झारखंड के सरकारी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में नवनियुक्त सहायक आचार्यों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने उनके पिछले वित्तीय वर्ष के बकाया वेतन भुगतान में आ रही तकनीकी अड़चनों को दूर करते हुए भुगतान का रास्ता साफ कर दिया है। इस संबंध में प्राथमिक शिक्षा निदेशक मनोज कुमार रंजन ने 13 जुलाई को आदेश जारी कर दिया है। इसकी जानकारी राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को दी है।

फंस गया था पेंच
प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राजकीय प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों के स्थापना व्यय के मद में ₹22 अरब 52 करोड़ 29 लाख 81 हजार 700 विभिन्न जिलों को आवंटित किए गए थे।
हालांकि, पूर्व में जारी एक आवंटन आदेश (पत्रांक-566, दिनांक 15.04.2026) की शर्त के कारण एक बड़ा पेंच फंस गया था। उस शर्त के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं उससे पूर्व के किसी भी बकाया वेतन का भुगतान प्राथमिक शिक्षा निदेशक के आदेश के बिना नहीं किया जाना था।
इस तकनीकी नियम के कारण कई जिलों में नवनियुक्त सहायक आचार्यों के वित्तीय वर्ष 2025-26 के कार्यकाल का बकाया वेतन रुक गया था, जिसकी शिकायतें निदेशालय को मिल रही थीं।
अब सीधे होगा भुगतान
शिक्षकों को समय पर वेतन न मिलने के मामले को विभागीय सचिव द्वारा गंभीरता से लिया गया। लगातार की जा रही समीक्षा बैठकों के बाद सरकार ने नियमों में ढील देने का निर्णय लिया। सरकार ने साफ किया है कि पूर्व में जारी आदेश की कंडिका-4(क) में उल्लेखित प्रतिबंध नवनियुक्त सहायक आचार्यों के मामले में प्रभावी नहीं होगा।
राशि से मिलेगा बकाया
ये शिक्षक वित्तीय वर्ष 2025-26 के जिस भी सेवाकाल के बकाया वेतन के हकदार हैं, उनका भुगतान वर्तमान में आवंटित राशि से ही तुरंत कर दिया जाएगा। भुगतान करते समय पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों और शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
अधिकारियों को निर्देश
निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों में यह ढील सिर्फ और सिर्फ नवनियुक्त सहायक आचार्यों के बकाया वेतन भुगतान तक ही सीमित रहेगी। इसके अलावा, सभी संबंधित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे वेतन भुगतान से जुड़ी अन्य सभी आवश्यक शर्तों और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
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