लखनऊ। उत्तर प्रदेश के डीएम ऑफिस परिसर में बनी एक मस्जिद को लेकर कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मस्जिद को हटाने का आदेश जारी किया है। साथ ही, उस पर कब्जा रखने वालों पर भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया है।

यह मामला सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित करीब 315 वर्ग मीटर के क्षेत्र में बनी मस्जिद से जुड़ा है। बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप था कि यह सरकारी और बेहद संवेदनशील जमीन है, जहां गोपनीय सरकारी काम होते हैं। वहां अवैध रूप से मस्जिद का निर्माण किया गया है। धार्मिक गतिविधियों के अलावा इस परिसर का व्यावसायिक इस्तेमाल भी हो रहा था।
परिसर में एक पोस्ट ऑफिस चल रहा था और 3-4 कमरे बाहरी लोगों को किराये पर दिए गए थे, जिसका मासिक किराया मस्जिद कमेटी खुद वसूल रही थी। सहारनपुर के सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
कोर्ट ने राजस्व रिकॉर्ड्स की जांच के बाद पाया कि यह जमीन (खसरा नंबर 539) बहुत पहले से ‘कलेक्ट्रेट/कचहरी’ की सरकारी जमीन के रूप में दर्ज है। मस्जिद पक्ष इसके निजी संपत्ति होने का कोई पुख्ता दस्तावेजी सबूत नहीं दे पाया।
कोर्ट ने माना कि एक संवेदनशील सरकारी दफ्तर के भीतर इस तरह की अनधिकृत गतिविधि से दफ्तर की सुरक्षा और गोपनीयता प्रभावित हो रही थी। कोर्ट ने इसे ‘अवैध अतिक्रमण’ मानते हुए यूपी पब्लिक प्रेमिसेस एक्ट के तहत ₹6.41 करोड़ का जुर्माना लगाया है। यह सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के सर्किल रेट के हिसाब से तय किया गया है)।
मस्जिद को खाली करने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है, जिसके बाद प्रशासन खुद इसे हटाने की कार्रवाई करेगा। मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली तनवीर अहमद और स्थानीय मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह मस्जिद कोई नया निर्माण नहीं है, बल्कि लगभग 150 साल पुरानी (आजादी के पहले की) है।
यहां सालों से कलेक्ट्रेट के कर्मचारी और आने-जाने वाले लोग नमाज पढ़ते आ रहे हैं। कड़े विरोध की चेतावनी देते हुए कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी इस फैसले को एकतरफा बताया। कहा कि वे इस आदेश के खिलाफ डिस्ट्रिक्ट जज या इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील (चैलेंज) करेंगे।
शिकायतकर्ता विकास त्यागी ने फैसले का स्वागत किया है। कहा है कि यह एक संवेदनशील सरकारी क्षेत्र था, जहां किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार्य नहीं है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई नियमानुसार और मानक एंटी-एनक्रोचमेंट (अतिक्रमण हटाओ) प्रक्रिया के तहत ही की गई है।
कोर्ट ने अपील दाखिल करने के लिए 30 दिनों का वक्त दिया है। इसलिए फिलहाल ग्राउंड पर तुरंत कोई तोड़फोड़ नहीं की गई है। मुस्लिम पक्ष अब ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।
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