राजस्थान। बीकानेर रियासत के इतिहास, कलात्मक विरासत और शाही परंपरा को समझने में रियासतकालीन सिक्कों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। महाराजा गंगा सिंह के शासनकाल से जुड़े सिक्के आज भी दुनियाभर के मुद्राशास्त्रियों और संग्रहकर्ताओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन सिक्कों में ब्रिटिश भारत की छाप के साथ बीकानेर रियासत की राजकीय पहचान साफ तौर पर दिखाई देती है।
बीकानेर के प्रसिद्ध मुद्राशास्त्री सुधीर लुणावत के अनुसार, महाराजा गंगा सिंह के शासनकाल से संबंधित वर्ष 1894, 1895 और 1897 के सिक्के ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
चांदी का एक रुपये के सिक्के के एक ओर महारानी विक्टोरिया का चित्र और दूसरी ओर बीकानेर रियासत का राजकीय अभिलेख अंकित है।
एक पाव आना और आधा पैसा मूल्यवर्ग के तांबे के सिक्कों पर महारानी विक्टोरिया का चित्र, मूल्यवर्ग और ‘बीकानेर स्टेट’ का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
महाराजा गंगा सिंह के शासनकाल की मुद्राओं में वर्ष 1937 में उनकी राज्यारोहण की स्वर्ण जयंती के अवसर पर जारी किया गया ‘नजराना रुपया’ (जिसे गंगाशाही रुपया भी कहा जाता है) सबसे खास माना जाता है। इस सिक्के पर महाराजा गंगासिंह का चित्र अंकित है।
इसके अतिरिक्त, इस ऐतिहासिक अवसर पर जारी की गई सोने की मोहर और आधी मोहर भी तत्कालीन रियासत की राजकीय प्रतिष्ठा और उत्कृष्ट धातु कला का परिचय देती हैं।
मुद्राशास्त्री सुधीर लुणावत के मुताबिक पुराने सिक्के केवल धातु के टुकड़े नहीं, बल्कि इतिहास के जीवंत दस्तावेज हैं। इन पर अंकित चित्र, लेख और तिथियां उस काल की राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को समझने का जरिया हैं।
महाराजा गंगासिंह की जयंती के अवसर पर इन ऐतिहासिक मुद्राओं का स्मरण नई पीढ़ी को बीकानेर के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध मुद्राशास्त्रीय धरोहर से परिचित कराने का एक बेहतरीन अवसर है।
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