देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों पर हुई पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, इन्‍हें राहत नहीं

नई दिल्ली देश मुख्य समाचार
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नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों और युवाओं द्वारा देशव्यापी स्तर पर किए गए विरोध-प्रदर्शनों एवं उस पर हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के बीच एक स्पष्ट संतुलन बनाने के कड़े निर्देश दिए हैं। 

मामले से जुड़ी मुख्य बातें

जस्टिस सूर्यकांत ने की टिप्पणी की कि जिन्होंने कानून को अपने हाथ में लिया है, उन्हें कानून के दायरे में ही लाया जाना चाहिए। कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को आदेश दिया है कि जिन छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ कोई भी कड़ा या दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाए।

हिरासत में लिए गए सभी नाबालिग छात्रों को तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया गया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि निष्पक्ष जांच का मतलब दोनों पक्षों के अधिकारों की रक्षा करना है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि निष्पक्ष जांच में प्रदर्शन के दौरान घायल हुए 200 से अधिक पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की चिंताओं को भी शामिल किया जाना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि नागरिक हो या पुलिस बल, लोकतांत्रिक व्यवस्था में दोनों पक्षों की ओर से “आत्म-अनुशासन” बनाए रखना अनिवार्य है।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई दोनों की निष्पक्ष जांच के लिए SIT (विशेष जांच दल) गठित करने का फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान में शांतिपूर्ण और वैध विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार पूरी तरह से सुरक्षित है। महज आंदोलन होने के आधार पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज या अत्यधिक बल प्रयोग को जायज नहीं ठहराया जा सकता।

अदालत ने कहा कि पुलिस सभी सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन वीडियो, बॉडी-वॉर्न कैमरा की रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार का रिकॉर्ड और पीसीआर कॉल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, ताकि जांच में उनका इस्तेमाल हो सके।

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प्रदर्शनकारियों का डिजिटल डेटा सुरक्षित रहे।पुलिस ने प्रदर्शनकारियों का जो भी डिजिटल डेटा (जैसे मोबाइल, वीडियो, लोकेशन आदि) जुटाया गया है, उसे सुरक्षित रखा जाए। सार्वजनिक नहीं किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जिन लोगों की आपराधिक पृष्ठभूमि रही है या जिन्होंने हिंसक वारदातों में भाग लिया है, उन्हें कोई सुरक्षात्मक राहत नहीं दी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को नोटिस जारी किया। राज्यों के मुख्य सचिवों को अगली सुनवाई में ऑनलाइन पेश होने के लिए कहा है।

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