

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पुलिस का खौफ दिखाकर लोगों से वसूली करने वाले एक शातिर गिरोह का मिसरोद पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य अभी भी फरार हैं जिनकी तलाश जारी है।
काम करने का तरीका
जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद डरावनी और सुनियोजित थी। आरोपी भोपाल के सलैया इलाके में एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी से घूमते थे और ऐसे लोगों की तलाश करते थे जिन्हें आसानी से डराया जा सके।

किसी को रोकने के बाद वे खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर आक्रामक तरीके से पूछताछ शुरू करते थे।पीड़ितों को यह कहकर डराया जाता था कि उनके खिलाफ एमडी ड्रग्स का गंभीर मामला दर्ज किया जा रहा है। गिरफ्तारी और सामाजिक बदनामी के डर से लोग आसानी से उनके चंगुल में फंस जाते थे।
एक मामले में तो आरोपियों ने एक युवक को रोककर उसे ड्रग्स मामले में फंसाने की धमकी दी। उसके घर की कॉलोनी तक उसका पीछा किया, ताकि उसपर यह दबाव बना रहे कि वह पुलिस की निगरानी में है। इसके बाद डर के मारे पीड़ित से नकदी और कीमती सामान लूट लिया गया।

ये रैकेट की मास्टरमाइंड
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि इस गिरोह की कथित मास्टरमाइंड एक महिला है, जो खुद को वकील बताती थी।
वह कानूनी प्रक्रियाओं और प्रावधानों की अपनी जानकारी का इस्तेमाल करके गिरोह की धमकियों को पीड़ितों के सामने पूरी तरह सच और भरोसेमंद साबित करती थी।
इस कानूनी धोखेबाजी के कारण पीड़ितों को यह विश्वास हो जाता था कि आरोपियों के वास्तव में पुलिस से गहरे ताल्लुक हैं। इससे वे विरोध करने या तुरंत शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे।
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस महिला का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ पहले से ही मारपीट तथा चाकूबाजी (Stabbing) जैसे कई मामले दर्ज हैं।
पुलिस की कार्रवाई
मिसरोद थाने में एक पीड़ित की शिकायत के आधार पर पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की। इलाके के सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी सर्विलांस (Technical Surveillance) और स्थानीय खुफिया तंत्र की मदद से पुलिस ने आरोपियों तक पहुंच बनाई।
पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्हें अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली सफेद रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी को भी जब्त कर लिया गया है।
आगे की जांच
एडीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, पुलिस यह पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है कि इस गिरोह ने इसी तरीके से और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और क्या शहर में दर्ज अन्य शिकायतें भी इसी नेटवर्क से जुड़ी हैं।
फरार चल रहे बाकी दो आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
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