शिक्षित समाज के निर्माण के लिए शिक्षकों का सम्मान जरूरी : रविंद्र नाथ महतो

झारखंड
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  • पासवा ने झारखंड के 5000 से अधिक शिक्षकों को किया सम्मानित

रांची। प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन (पासवा) के तत्वावधान में 11वां राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन 10 सितंबर को रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में किया गया। इस अवसर पर झारखंड के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 5000 से अधिक शिक्षकों को सम्मानित किया गया।

समारोह में मुख्य अतिथि झारखंड के विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो, वित्त एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव, रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अजीत कुमार सिन्हा, डीएवी मैनेजिंग कमेटी के पूर्व निदेशक एलआर सैनी थे। कार्यक्र में पासवा के प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे, राष्ट्रपति पुरस्कार अवार्ड से सम्मानित सुश्री फलक फातिमा, पासवा के प्रदेश महासचिव नीरज कुमार, संजय प्रसाद, महानगर अध्यक्ष डॉ सुषमा केरकेट्टा, राशिद अंसारी, अल्ताफ अंसारी सहित पासवा के प्रदेश स्तरीय पदधारी सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम का उद्घाटन अतिथियों ने पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धा सुमन अर्पित कर एवं दीप जलाकर किया। इस अवसर पर झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र कुमार महतो ने कहा कि शिक्षकों का सम्मान होना चाहिए। समाज जो आगे बढ़ रहा है या बढ़ता है, उसमें शिक्षकों का योगदान होता है। अच्छे शिक्षकों की शिक्षा की वजह से ही बेहतर और शिक्षित समाज का निर्माण होता है। शिक्षक तो बड़े-बड़े काम किए हैं। साम्राज्य की स्थापना की है। देश का पहला साम्राज्य शिक्षक चाणक्य के कारण ही बना था। भगवान बुद्ध को भी शिक्षक कहा जाएगा।

वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि आज कोई भी व्यक्ति समाज के जिस पद पर भी पहुंचा है, निश्चित रूप से उसमें उन शिक्षकों का ही योगदान है जिन्होंने उन्हें गढ़ा है। अपने विद्यार्थी जीवन के संस्मरण को सुनाते हुए उन्होंने कहा कि वह खुद अपने प्राइमरी कक्षा से उच्च कक्षा तक के पढ़ाई के शिक्षकों के योगदान को नहीं भूल सकते। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन काल में जो भी शिक्षक आए हैं, उनका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक की यह जिम्मेवारी है कि वह अपने कर्तव्यों का निर्वहन इस तरह से करें कि समाज के लिए आदर्श नागरिक बन सके, तभी देश प्रगति कर सकता है।

पासवा के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने कहा कि वर्ष, 2011 में संस्‍था की  स्थापना हुई थी। तभी से संगठन द्वारा शिक्षक और विद्यार्थियों के प्रोत्साहन के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया जाता है। इसके माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों को पासवा सम्मानित करता है। उनका हौसला अफजाई करता है। जो शिक्षक सम्मानित हो रहे हैं, वह बेहतर समाज का निर्माण करेंगें।

दूबे ने निजी विद्यालयों को आरटीई की कठिन शर्तों से हो रही परेशानियां पर विचार रखें। उन्‍होंने कहा कि निजी विद्यालय झारखंड में ग्रामीण शिक्षण व्यवस्था की रीढ़ है। यह बहुत ही सीमित संसाधन में शिक्षा प्रदान करते हैं। कठिन शर्तों की बजाय इनका उत्साह वर्धन आवश्यक है। वह सरकार के समक्ष उनकी मांगों को रखेंगे, ताकि निजी विद्यालय के संचालन में किसी तरह की परेशानी नहीं हो।

रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अजीत सिन्हा ने छात्रों में रीडिंग हैबिट पर बल देने पर बात की। उन्होंने कहा की बदलती परिस्थिति में बच्चों को किताब से जोड़ने की आवश्यकता है। हालांकि वर्तमान स्थिति में शिक्षा में मोबाइल फोन का इस्तेमाल एक बड़ी चुनौती है। इसका व्यापक असर बच्चों में हो रहा है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट से कई जानकारियां हमें मिल रही है। इसका सदुपयोग भी हो रहा है, लेकिन अभिभावकों को हमेशा बच्चों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। बिना काम के उनके हाथों में मोबाइल नहीं दिया जाना चाहिए। सोने के वक्त कमरे से फोन को दूर रख रखना चाहिए। बच्चों को किताब पढ़ने की आदत डालनी होगी। शिक्षक इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

इस अवसर पर 200 प्रिंसिपल और डायरेक्टर को भी एक मंच पर सम्मानित किया गया। झारखंड के विभिन्न जिलों से आए 5000 से अधिक निजी विद्यालयों के शिक्षकों को मोमेंटो, सर्टिफिकेट एवं अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह को डीएवी मैनेजिंग कमेटी के निदेशक एलआर सैनी, सुश्री फलक फातिमा, डॉ सुषमा केरकेट्टा, मोहम्मद रशीद अंसारी आदि ने भी संबोधित किए। कार्यक्रम का संचालन पासवा वॉलेंटियर्स मनीष पाठक, प्रियम सिन्हा एवं नंदिनी चन्द्रा ने किया।

इस अवसर पर डीपीएस स्कूल, सेक्रेड हर्ट स्कूल, छोटानागपुर पब्लिक स्कूल बूटी मोड़ एवं कारमेल पब्लिक स्कूल बोकारो की ओर से वेलकम सांग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर शिक्षकों का स्वागत किया गया। स्कूलों के बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत कि‍या।

कार्यक्रम को सफल बनाने में चतरा से नीरज सहाय, हजारीबाग से बिपीन कुमार, प्रवीण प्रकाश, ज्ञानेश्वर दयाल, बोकारो से विद्या गौतम, लोहरदगा से मजीद आलम, बच्चन पाण्डेय, आदित्य गुप्ता, रघुवीर राम, धनबाद से मो जिन्ना, संजय कुमार, राशिद अंसारी, अमीन अंसारी, मजीद अंसारी, फलक फातिमा, मेहूल दुबे, चारुबाला, अनिकेत कुमार, शुभम कुमार, अभाष कुमार, माणिक पाठक, मनीष पाठक, पीयूष कुमार, आशुतोष भारती, संजय तिर्की, प्रियम सिन्हा, विशाल कुमार, ऋषि कुमार, अजहर आलम, फिजा नसीम, नेहा सिंह, हीतेष कुमार, राकेश प्रजापति, काजल कुमारी, अनुष्का कुमारी, श्रुति कुमारी, आसमां परवीन, जेमसा के पदाधिकारी सैयद अंसारुल्लाह, महताब अंसारी, मो उस्मान, मो अर्श की भूमिका रही।

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