ई-विद्यावाहिनी में 24 फीसदी शिक्षक अटेंडेस नहीं बना रहे, रुकेगा वेतन

झारखंड
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  • ई-विद्यावाहिनी में बच्चों की हाजिरी नहीं बनाने वाले 515 हेडमास्टर को शोकॉज, वेतन पर रोक

जमशेदपुर। पिछले माह हुई 9वीं और 10वीं की मासिक मूल्यांकन परीक्षा में 25 विद्यालय का प्रदर्शन काफी खराब रहा। परीक्षा में खराब प्रदर्शन करने वाले हाई स्कूलों का सभी बीईईओ निरीक्षण करेंगे। बोर्ड परीक्षा को देखते हुए बच्चों के प्रदर्शन में सुधार की कार्ययोजना बनाते हुए तैयारी करायें।

सभी बीईईओ को हर माह अपने पोषक क्षेत्र के 15 विद्यालयों का निरीक्षण सुनिश्चित करना है। लक्ष्य पूरा नहीं होने पर वेतन पर रोक लगाई जाएगी। ये बातें उपायुक्त श्रीमती विजया जाधव ने शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कही।

डीसी ने स्पष्ट कहा कि बीईईओ अपनी जवाबदेही समझते हुए खराब प्रदर्शन वाले स्कूलों में रेमेडियल क्लास करायें। बच्चों में पठन पाठन के प्रति रूचि जाए। ऑनलाइन क्लास की व्यवस्था सभी हाईस्कूलों में शुरू की गई है, जहां जिला स्तर से विशेषज्ञ शिक्षक रोज जुड़ते हैं। बच्चों की शत प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करें।

समीक्षा बैठक में सर्व शिक्षा अभियान, एमडीएम एवं अन्य शिक्षा विभागीय योजनाओं की समीक्षा की गई। उपायुक्त द्वारा सख्त निर्देश दिया गया कि ई-विद्यावाहिनी में बच्चों का अटेंडेंस दर्ज हो जाने के बाद ही एमडीएम का राशन निकलेगा।

जिले में 515 विद्यालय ऐसे हैं, जहां अभी भी ई-विद्यावाहिनी में बच्चों की उपस्थिति दर्ज नहीं की जा रही। डीईओ को सभी 515 विद्यालयों के हेडमास्टर को शो कॉज करते हुए वेतन पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया।

जिले के 24 फीसदी शिक्षक ई- विद्यावाहिनी में अटेंडेंस नहीं बना रहे। उपायुक्त द्वारा डीईओ को इसकी जांच करने और ऐसे शिक्षकों का वेतन भुगतान नहीं करने का निर्देश दिया गया।

पूरे जिले में करीब तीन हजार बच्चे हैं, जिनका बैंक खाता खोलने के लिए आधार नंबर या अन्य त्रुटि के कारण बैंकों में फॉर्म जमा नहीं हो पा रहा। उपायुक्त ने सभी प्रखंडों में 16 दिसंबर से कैम्प मोड में सभी सीएससी को टैग करते हुए बच्चों का आधार बनवाने, पहले से बने आधार में कोई त्रुटि हो तो उसे सुधारने और इसके बाद भी कोई अन्य कारण से बैंक अगर फॉर्म नहीं स्वीकार कर पा रहे हों तो उसमें सुधार कर अगले 7 दिन में सभी तीन हजार बच्चों के फॉर्म जमा कराने के निर्देश दिए।

उपायुक्त द्वारा सभी बीईईओ को सख्त हिदायत दी गई कि बैंक खाता नहीं होने के कारण अगर बच्चों को प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति की राशन नहीं मिलती हो तो सभी बीईईओ की जवाबदेही तय की जाएगी। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 1 लाख 64 हजार छात्रों को प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति का लाभ मिलना है, जिसमें 1 लाख 16 हजार की ऑनलाइन इंट्री हुई है। शेष बच्चों की इंट्री भी एक सप्ताह में कराने का निर्देश दिया गया।

एडीएम लॉ एंड ऑर्डर ने सभी बीईईओ को गुरू गोष्ठी में शिक्षकों की काउंसिलिंग करने की बात कही। पैरेंट टीचर मीटिंग में बच्चों की पठन पाठन रिपोर्ट अभिभावकों से साझा करने, कोई बच्चा कई दिनों से स्कूल नहीं आ रहे हो तो उनके घर जाकर बच्चों एवं अभिभावकों को प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया।

समाहरणालय सभागार में आयोजित बैठक में एडीएम लॉ एंड ऑर्डर नन्दकिशोर लाल, निदेशक एनईपी श्रीमती जयोत्सना सिंह, डीईओ श्रीमती निर्मला बरेलिया, डीएसई सुश्री निशु कुमारी, एसडीओ (शिक्षा) आशीष पांडेय, सभी प्रखंडों के बीईईओ, सीआरपी और शिक्षा विभाग के जिला स्तरीय अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।