Ranchi: रिम्स में इन मेडिकल छात्रों का रद्द होगा नामांकन, जानें पूरा मामला

झारखंड
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रांची। बड़ी खबर आई है, रिम्स में फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर एमबीबीएस में नामांकन लेने के लगातार सामने आए मामलों के बाद प्रबंधन ने बड़ा फैसला लिया है।

अब नए शैक्षणिक सत्र 2025-26 में नामांकित सभी एमबीबीएस छात्रों के जाति एवं आवासीय प्रमाणपत्रों का विभिन्न जिलों के जिला प्रशासन को सत्यापन के लिए भेज दिया गया है।

सत्यापन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर संबंधित छात्र का नामांकन तत्काल रद्द किया जाएगा और नियमानुसार आगे की कार्रवाई होगी।

रिम्स प्रबंधन का मानना है कि इस कदम से प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए मेडिकल सीट हासिल करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। वर्ष 2025-26 बैच में एमबीबीएस की 180 सीटों पर नामांकन हुआ है।

अब सभी विद्यार्थियों के दस्तावेजों की क्रमवार जांच कराई जाएगी। संस्थान के जन संपर्क पदाधिकारी डॉ. शिशिर बताते हैं कि अभी जो भी नामांकन होता है, उसकी पूरी जांच काउंसिल के द्वारा की जाती है, जिसके बाद ही नामांकन की प्रक्रिया रिम्स में होती है।

लेकिन कुछ छात्रों के फर्जी प्रमाण पत्र मिलने के बाद प्रबंधन खुद से सभी छात्र-छात्राओं के प्रमाण पत्र की जांच करवा रहा है। इससे पहले भी किसी की शिकायत मिलने पर जांच होती थी।

रिम्स में अब तक फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर प्रवेश लेने वाले दो एमबीबीएस छात्रों का नामांकन रद्द किया जा चुका है। हाल ही में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र आशीष कुमार का जाति प्रमाणपत्र साहिबगंज जिला प्रशासन की जांच में फर्जी पाया गया। शिकायत मिलने पर रिम्स ने प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए उपायुक्त को पत्र भेजा था।

जांच रिपोर्ट में प्रमाणपत्र अमान्य मिलने के बाद छात्र का नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इससे पहले वर्ष 2025 बैच की छात्रा काजल कुमारी का भी दाखिला रद्द किया गया था। गिरिडीह प्रशासन की जांच में उसका जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया था।

आरोप था कि उसने आरक्षित श्रेणी का लाभ लेने के लिए जाली प्रमाणपत्र का उपयोग कर एमबीबीएस सीट हासिल की थी। जांच पूरी होने के बाद दिसंबर 2025 में उसका नामांकन निरस्त कर दिया गया।

रिम्स में केवल एमबीबीएस ही नहीं, बीडीएस पाठ्यक्रम में भी फर्जी प्रमाणपत्र का मामला सामने आ चुका है। बीडीएस छात्रा ओली विश्वकर्मा के जाति प्रमाणपत्र की शिकायत मिलने पर जांच कराई गई थी। जिला प्रशासन की रिपोर्ट में उसका प्रमाणपत्र भी फर्जी पाया गया था।

बता दें कि, रिम्स में फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए नामांकन के मामलों की जांच सीआईडी भी कर रही है। हाल के महीनों में सीआईडी की टीम संस्थान पहुंचकर निदेशक, अधीक्षक सहित अन्य से पूछताछ कर चुकी है तथा संबंधित दस्तावेज भी अपने साथ ले गई है।

ऐसे में रिम्स प्रबंधन अब सभी छात्रों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन कर भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी में है।

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