नई दिल्ली। भारत सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram पर अवैध गतिविधियों को लेकर निगरानी और कड़ी कर दी है। दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल गृह मंत्रालय के एक विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार टेलीग्राम के समूहों और चैनलों पर सक्रिय रूप से नजर रख रही है।

सरकार के अनुसार इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी, बाल यौन शोषण सामग्री, फर्जी नौकरी विज्ञापनों, ऑनलाइन उत्पीड़न और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किए जाने की आशंका है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 से अब तक टेलीग्राम से जुड़े 6.88 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। सरकार का दावा है कि इन साइबर धोखाधड़ी मामलों के कारण भारतीय नागरिकों को करीब 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम को-ऑडिनेशन सेंटर द्वारा तैयार 35 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि टेलीग्राम की कुछ गोपनीयता सुविधाएं अपराधियों की पहचान करना कठिन बना देती हैं।
रिपोर्ट में ऐसे समूहों के स्क्रीनशॉट भी शामिल किए गए हैं जिनमें कथित तौर पर फर्जी नौकरी विज्ञापन, बाल शोषण से संबंधित सामग्री और पायरेटेड कंटेंट साझा किया जा रहा था।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, केवल जनवरी से मई 2026 के बीच टेलीग्राम के माध्यम से ऑनलाइन उत्पीड़न और बाल शोषण सामग्री से जुड़े 1,556 मामलों की शिकायतें दर्ज की गईं।
यह रिपोर्ट उस मामले का हिस्सा है जिसमें केंद्र सरकार ने नीट-यूजी परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध का अदालत में बचाव किया था।
सरकार का कहना है कि साइबर अपराधी बंद समूहों और चैनलों का उपयोग कर लोगों को ठगते हैं, इसलिए ऐसे नेटवर्क की पहचान और निगरानी आवश्यक है।
वहीं टेलीग्राम ने अदालत में दावा किया कि उसके प्लेटफॉर्म पर अवैध सामग्री कुल कंटेंट का 0.1 प्रतिशत से भी कम है। कंपनी लगातार ऐसी सामग्री हटाने के लिए कार्रवाई कर रही है।
भारत में टेलीग्राम के लगभग 15 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। हाल के महीनों में इस प्लेटफॉर्म को लेकर सरकारी जांच और नियामकीय निगरानी काफी बढ़ी है।
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