नई दिल्ली। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व विधायक और कांग्रेस नेत्री अलका लांबा को 2024 में जंतर-मंतर पर हुए महिला आरक्षण प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराया है। अदालत ने उन्हें बिना अनुमति प्रदर्शन और निषेधाज्ञा उल्लंघन से जुड़े आरोपों में दोषसिद्ध माना।
यह मामला 2024 में महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान धारा 144 लागू थी।
इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने इकट्ठा होकर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया था। इसी मामले में पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज किया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए दस्तावेज, वीडियो फुटेज और पुलिस गवाहों के बयान प्रथम दृष्टया आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू नियमों का पालन सभी नागरिकों और राजनीतिक दलों पर समान रूप से लागू होता है।
अब इस मामले में सजा पर बहस 4 जून को होगी। अदालत उसी दिन यह तय करेगी कि अलका लांबा को जुर्माना, सशर्त राहत या अन्य कानूनी सजा दी जाएगी।
फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया है। विपक्षी दलों का कहना है कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन को अपराध की तरह पेश किया जा रहा है।
वहीं कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम प्रभाव सजा के स्वरूप पर निर्भर करेगा।
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