बिहार में नकली नोट और सोना तस्करी का भंडाफोड़, ऐसे काम करता था गिरोह

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  • ₹1 करोड़ के जाली नोट, 38 सोने के बिस्कुट और हथियारों के साथ 2 गिरफ्तार

पटना। बिहार की पूर्वी चंपारण जिला पुलिस को जाली नोट और अवैध तस्करी के एक बहुत बड़े सिंडिकेट को ध्वस्त करने में भारी सफलता मिली है। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर मोतिहारी के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के भोपतपुर गांव में एक साझा स्पेशल ऑपरेशन चलाते हुए देशव्यापी नेटवर्क से जुड़े एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है।

इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में नकली नोट, असली कैश, भारी मात्रा में सोना और अवैध हथियार बरामद किए हैं।

रात में बोला धावा

यह पूरी कार्रवाई सदर-1 और सदर-2 के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी जितेश पांडेय के नेतृत्व में की गई। इस विशेष टीम में दो ट्रेनी डीएसपी, पांच थानों की पुलिस बल और जिला आसूचना इकाई के जवान शामिल थे। पुलिस ने आधी रात को भोपतपुर गांव में चिन्हित ठिकानों की घेराबंदी कर अचानक छापेमारी की, जिससे तस्करों को भागने का मौका नहीं मिला।

मुख्‍य सरगाना सुलेमान

पुलिस ने इस धंधे के मुख्य सरगना सुलेमान अंसारी और उसके मुख्य सहयोगी इम्तियाज को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। इनके साथ कुछ अन्य संदिग्धों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

बरामदगी की सूची

  • आरोपियों के पास से और उनके ठिकानों से पुलिस ने जो सामान जब्त किया है, उसे देखकर अधिकारी भी हैरान हैं:
  • नकली नोट : लगभग ₹1 करोड़ मूल्य के जाली नोट।
  • असली कैश नोट : ₹13 लाख रुपये नकद।
  • सोना : 38 पीस सोने के बिस्कुट (रोल गोल्ड और फाइन गोल्ड)।
  • हथियार : अवैध हथियार (पिस्टल) और कई जिंदा कारतूस (बुलेट्स)।
  • वाहन : तस्करी और परिवहन में इस्तेमाल होने वाली एक गाड़ी।

ऐसे करते थे ठगी

गिरफ्तार आरोपियों से हुई शुरुआती पूछताछ में इस गिरोह के काम करने के बेहद शातिराना तरीके का पता चला है। यह गिरोह सीधे-साधे और अमीर लोगों को निशाना बनाता था। उन्हें झांसा दिया जाता था कि वे ₹5,000 असली नोट के बदले ₹15,000 के नकली नोट ले सकते हैं, जो मार्केट में हूबहू असली जैसे दिखते हैं।

ऐसे जीतते थे भरोसा

पहली बार में गिरोह लोगों का भरोसा जीतने के लिए जाली नोट की जगह असली नोट ही दे देता था। जब ग्राहक उसे बाजार में आसानी से चला लेता था, तो उसका लालच बढ़ जाता था।

बड़ा गेम करता था गिरोह

जब वही ग्राहक बड़े मुनाफे के चक्कर में लाखों रुपये लेकर आता था, तब गिरोह उसे नोटों की बड़ी-बड़ी गड्डियां थमा देता था। इन गड्डियों के ऊपर और नीचे तो असली या अच्छे जाली नोट होते थे। हालांकि, बीच में ‘बच्चों के खेलने वाले नोट’ भरे होते थे।

कनेक्शन की जांच शुरू

चूंकि मोतिहारी का यह इलाका नेपाल सीमा के बेहद करीब है, इसलिए पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इन जाली नोटों और सोने के बिस्कुटों का तार नेपाल या किसी अन्य देश से तो नहीं जुड़ा है। जब्त किए गए नोटों और सोने की प्रामाणिकता की जांच के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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