नई दिल्ली। भारतीय रेल में बड़ा बदलाव होने वाला है। इससे यात्रियों का नया अनुभव मिलेगा। इसकी तैयारी कर ली गई है।
देश की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन तैयार हो चुकी है। इसे जल्द ही जिंद में ट्रायल/संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है।
यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर काम करती है।
इसमें डीजल इंजन की जगह फ्यूल सेल होता है, जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के रिएक्शन से बिजली बनाता है।
इस प्रक्रिया में CO₂ या प्रदूषण नहीं निकलता है। सिर्फ पानी और गर्मी उत्पन्न होती है।
यानी यह ट्रेन पर्यावरण के लिए बेहद साफ और टिकाऊ मानी जा रही है।
अभी भारतीय रेल के कई रूट्स पर डीजल ट्रेनें चलती हैं।
हाइड्रोजन ट्रेन डीजल का क्लीन विकल्प है। कार्बन उत्सर्जन कम करेगी। भारत के ग्रीन एनर्जी मिशन को मजबूत करेगी।
शुरुआत में इस ट्रेन को हरियाणा के जींद-सोनीपत सेक्शन पर चलाने की योजना है।
भारतीय रेलवे इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। ट्रायल रन के बाद इसे नियमित सेवा में लाया जाएगा।
यह ट्रेन डीईएमयू (DEMU) रेक को मॉडिफाई करके बनाई गई है।
इसमें हाइड्रोजन स्टोरेज टैंक और फ्यूल सेल सिस्टम लगाया गया है।
भारत इसे “हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज रूट्स” योजना के तहत विकसित कर रहा है।
जर्मनी जैसे देशों में पहले से हाइड्रोजन ट्रेनें चल रही हैं।
अब भारत भी इस टेक्नोलॉजी में कदम रखकर वैश्विक ग्रीन ट्रांसपोर्ट की दौड़ में शामिल हो रहा है।
अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो जल्द ही यात्रियों को भारत में “धुआं नहीं, सिर्फ भाप छोड़ने वाली ट्रेन” में सफर करने का अनुभव मिलेगा।
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