नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र में परिसीमन विधियेक आ सकता है। इससे पहले प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन को लेकर एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। परिषद की एक कार्यपत्रिका में कहा गया है कि देश के 170 बड़े लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन “टार्गेटेड” तरीके से किया जाए, ना कि पूरे देश में एक समान फार्मूला लागू करके।
क्या है प्रस्ताव
रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान 543 लोकसभा सीटों में से 170 ऐसी सीटें हैं, जिनकी आबादी और भौगोलिक आकार बहुत बड़ा हो चुका है। परिषद ने सुझाव दिया है कि इन बड़े निर्वाचन क्षेत्रों को दो या तीन हिस्सों में विभाजित किया जाए, ताकि सांसदों पर प्रतिनिधित्व का बोझ कम हो और मतदाताओं को बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके।
ये है रणनीति
कार्यपत्रिका के अनुसार 59 लोकसभा क्षेत्रों का दो भागों में विभाजन किया जा सकता है। 111 लोकसभा क्षेत्रों का तीन भागों में विभाजन किया जा सकता है। इससे लोकसभा की कुल संख्या 543 से बढ़कर लगभग 824 सीटों तक पहुंच सकती है।
यहां अधिक असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से जनसंख्या वृद्धि वाले और बड़े निर्वाचन क्षेत्रों वाले राज्यों में अधिक नए संसदीय क्षेत्र बन सकते हैं। कुछ महानगरीय सीटें जैसे हैदराबाद और सिकंदराबाद भी संभावित तीन-तरफा विभाजन वाली सीटों में शामिल बताई गई हैं।
सरकार की तैयारी
यह सिफारिश ऐसे समय आई है, जब केंद्र सरकार 2026 के परिसीमन ढांचे पर काम कर रही है। संसद में पहले ही परिसीमन से जुड़े विधेयकों और लोकसभा सीटों की अधिकतम संख्या बढ़ाने के प्रस्तावों पर चर्चा हो चुकी है। सरकार का कहना है कि परिसीमन के बाद भी राज्यों के प्रतिनिधित्व में संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।
राजनीतिक महत्व
परिसीमन का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। दक्षिणी राज्यों ने आशंका जताई है कि जनसंख्या नियंत्रण में सफलता के बावजूद उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी कम हो सकती है। वहीं केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि किसी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा और सीटों की संख्या बढ़ने से सभी राज्यों को लाभ मिलेगा।
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