नई दिल्ली। प्राइवेट नौकरी करने वालों की बल्ले-बल्ले हो गयी है। जी हां! आम बजट 2023 में सरकार ने निजी कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए लीव एनकैशमेंट में छूट की सीमा तीन लाख रुपए से बढ़ाकर 25 लाख रुपए कर दी है।
आयकर कानून 1961 की धारा 10(10एए)(2) के तहत यह प्रावधान किया गया है। हालांकि धारा के अन्य प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यहां बता दें कि अगर जॉब में रहते हुए कोई कर्मचारी छुट्टियों को एनकैश कराता है, तो उसे सैलरी का हिस्सा माना जाता है।
सरकारी और निजी सेक्टर में काम करने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों को काम के दौरान छुट्टियां मिलती हैं। ये छुट्टियां Sick leave, Casual Leave और Earned Leave समेत कई अन्य तरह की छुट्टियां हो सकती हैं। इनमें से कुछ छुट्टियां तय समय के दौरान ना लेने पर अपने आप खत्म हो जाती हैं, लेकिन कुछ छुट्टियां ना लेने की स्थिति में खत्म नहीं होती हैं और अगले साल की छुट्टियों में जुड़ जाती हैं।
इस तरह जब आप नौकरी से रिटायर होते हैं या फिर इस्तीफा देते हैं, तो इन छुट्टियों को कैश करा सकते हैं। इसे ही लीव एनकैशमेंट कहा जाता है। लीव एनकैशमेंट से मिलने वाली रकम पर सरकार टैक्स लगाती है। इसी टैक्स छूट की सीमा को तीन लाख से बढ़ाकर 25 लाख कर दिया गया है।
छुट्टियों से मिलने वाली रकम को आय का हिस्सा माना जाता है, इसलिए सरकार पर उस पर टैक्स लगाती है। केंद्रीय और राज्य सरकारों के कर्मचारियों को लीव एनकैशमेंट पर कोई टैक्स नहीं देना होता। अगर कर्मचारी की मौत हो जाती है, तो उसे लीव एनकैशमेंट के तहत पूरी रकम दी जाएगी और उस पर भी कोई टैक्स नहीं लगेगा।
निजी सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट या इस्तीफे के समय लीव एनकैशमेंट के तहत जो रकम मिलती है, उसमें अधिकतम तीन लाख रुपए तक की रकम पर टैक्स नहीं लगता था। जिसे नए बजट में बढ़ाकर 25 लाख तक कर दिया गया है।
बता दें कि लीव एनकैशमेंट के तहत मिलने वाली रकम पर आयकर कानून की धारा 89 के तहत टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है। इस दौरान एनकैश की गई छुट्टियां आपकी कुल अर्न्ड लीव की आधी या फिर 30 दिन, जो भी कम हो, उससे ज्यादा नहीं होनी चाहिए। लीव एनकैशमेंट की गणना बेसिक पे और महंगाई भत्ते के आधार पर किया जाता है। नौकरी से निकाले जाने की स्थिति में कर्मचारी को लीव एनकैशमेंट नहीं मिलता।