
- टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया का राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न
रांची। संसद के शीतकालीन सत्र में देशभर के शिक्षक संसद मार्च करेंगे। यह निर्णय टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अधिवेशन में लिया गया। बीते दिन लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में अधिवेशन हुआ था। फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चन्द्र शर्मा ने इसकी अध्यक्षता की थी।
इस अधिवेशन को बतौर मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और बतौर विशिष्ट अतिथि यूपी बीजेपी के उपाध्यक्ष नीरज सिंह ने संबोधित किया। फेडरेशन का अगला अधिवेशन झारखंड में कराए जाने की घोषणा भी की गई।
इस अवसर पर फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव और अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव राम मूर्ति ठाकुर ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने से पूर्व के नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्ति के लिए केंद्र सरकार संसद के माध्यम से पहल करे अन्यथा शिक्षक बड़ी लड़ाई की ओर बढ़ेंगे।
इसके साथ ही श्री ठाकुर ने शिक्षकों के राष्ट्रीय सेवा शर्तों सहित वेतन, स्वास्थ्य सुरक्षा में केंद्र की भांति एकरूपता लाने और पुरानी पेंशन को बहाल करने से संबंधित तथ्यों को पेश किया। उन्होंने कहा कि फेडरेशन का स्पष्ट मत है कि जब देश में एक शिक्षा नीति है। नियुक्ति की एक शर्त है, तब फिर वेतन और अन्य सुविधाओं में विभिन्नता क्यों है।
फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चन्द्र शर्मा ने कहा कि देश भर के शिक्षकों के हितों के लिए संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के द्वारा संसद मार्च किया जाएगा। देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों शिक्षक प्रतिनिधियों की उपस्थिति में इस अधिवेशन में कई प्रस्ताव पारित हुए। झारखंड से फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव अजय कुमार सिंह और राजेश कुमार सिन्हा शामिल हुए।
ये प्रस्ताव हुए पारित
आरटीई से पूर्व के नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्ति के लिए संसद में संशोधन का प्रस्ताव केंद्र सरकार पारित करे।
पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
देशभर के सभी राज्यों में शिक्षकों के लिए केंद्रीय वेतनमान लागू हो। वेतन में एकरूपता हो।
शिक्षकों को एमएसीपी का लाभ दिया जाए।
प्रत्येक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक का पद सृजित किया जाए।
चुनाव की वास्तविक ड्यूटी, जनगणना, आपदा को छोड़कर अन्य गैर शैक्षणिक कार्यों से देश भर के शिक्षकों को अलग किया जाए।
केंद्रीय विद्यालय के अनुरूप ही देश के सभी विद्यालयों के लिए एक समान वार्षिक अवकाश तालिका हो।
देशभर के शिक्षकों को न्यूनतम 20 लाख का परिवार सहित स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा सुविधा प्रदान कराई जाए।
प्राथमिक शिक्षकों को भी विधान परिषद में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मताधिकार और निर्वाचन का अधिकार हो।
शिशु देख भाल भत्ते की स्वीकृति में दो बच्चों की सीमा को समाप्त किया जाए।
शिक्षकों के आश्रितों में से जो शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त और टीईटी उत्तीर्ण हो उन्हें अनुकंपा के आधार पर शिक्षक पद पर नियुक्ति का अवसर प्रदान किया जाए।
देश भर विद्यालयों के मर्जर पर रोक लगाई जाए।
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