सेल के सतर्कता अधिकारियों के लिए इंडक्शन कार्यक्रम का एमटीआई में शुभारंभ

झारखंड
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रांची। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के नव नियुक्त सतर्कता अधिकारियों के लिए ढाई दिवसीय इंडक्शन कार्यक्रम का सोमवार को सेल के रांची स्थित मैनेजमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एमटीआई) में शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य नव नियुक्त सतर्कता अधिकारियों को सतर्कता कार्यप्रणाली के विभिन्न आयामों से परिचित कराना और निवारक सतर्कता, निर्धारित प्रक्रियाओं, व्यावहारिक जांच एवं प्रणालीगत सुधारों के संबंध में उनकी समझ को सुदृढ़ करना है।

कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर सेल के कार्यपालक निदेशक (एचआर-एलएंडडी) संजय धर ने कहा कि विगत वर्षों में सेल में सतर्कता कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण विकास हुआ है। सतर्कता के क्षेत्र में अब निवारक सतर्कता, प्रणालीगत सुधारों और ऐसे संगठनात्मक वातावरण के निर्माण पर विशेष बल दिया जा रहा है, जहां नैतिक आचरण संगठनात्मक संस्कृति का अभिन्न अंग बने।

इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक (सतर्कता) एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी ने सतर्कता कार्य में नव नियुक्त अधिकारियों के लिए व्यापक एवं संवादात्मक इंडक्शन कार्यक्रम की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से तैयार किए गए इस ढाई दिवसीय कार्यक्रम में अनुभवी विशेषज्ञों एवं फैकल्टी सदस्यों के माध्यम से प्रतिभागियों को सतर्कता कार्यप्रणाली के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया जाएगा।

उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम में केस स्टडी एवं क्षेत्रीय अनुभवों को सम्मिलित किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि प्रतिभागी प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान को अपने दैनिक कार्यों में सामने आने वाली वास्तविक परिस्थितियों से प्रभावी रूप से जोड़ सकें।

मुख्य सतर्कता अधिकारी ने कहा कि सतर्कता अधिकारियों की भूमिका सामान्य कार्यात्मक दायित्वों से भिन्न एवं विशिष्ट होती है। शिकायतों की जांच एवं मामलों का परीक्षण सतर्कता कार्य के महत्वपूर्ण अंग हैं, किंतु इनके साथ-साथ अधिकारियों द्वारा प्रदर्शित व्यावसायिक आचरण, सौहार्दपूर्ण व्यवहार एवं विनम्रता का भी समान महत्व है।

उन्होंने कहा कि सतर्कता अधिकारी का कर्मचारियों एवं अधिकारियों के साथ व्यवहार ऐसा होना चाहिए, जिससे वे अपने दायित्वों का स्वतंत्र एवं निर्भीक रूप से निर्वहन कर सकें तथा संगठन में ईमानदारी, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के उच्चतम मानकों को बनाए रखा जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के इंडक्शन एवं संवादात्मक कार्यक्रमों का नियमित रूप से आयोजन किया जाना चाहिए, ताकि सतर्कता अधिकारी अनुभवी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के साथ-साथ अपने सहकर्मियों के अनुभवों से भी सीख सकें।

कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि प्रतिभागियों को अनुभवी फैकल्टी सदस्यों के साथ संवाद एवं विचार-विमर्श के माध्यम से सतर्कता कार्य के विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त हो।

प्रतिभागियों को औपचारिक प्रशिक्षण सत्रों के अतिरिक्त एमटीआई में उपलब्ध सीखने के वातावरण का उपयोग आपसी अनुभवों के आदान-प्रदान, विचार-विमर्श एवं गहन अध्ययन के लिए करने हेतु भी प्रोत्साहित किया गया है।

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