रायपुर। छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध पंडवानी लोक गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का 5 जुलाई 2026 तड़के निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं। पिछले काफी समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। उनके निधन की खबर से कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा।

एम्स में ली अंतिम सांस
तीजन बाई ने रविवार सुबह करीब 3:15 बजे रायपुर के एम्स में अंतिम सांस ली। वह 27 मई से एम्स रायपुर में भर्ती थीं। डॉक्टरों के अनुसार, वह गंभीर फेफड़ों के संक्रमण, सेप्सिस और एक्यूट किडनी इंजरी जैसी समस्याओं के कारण वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं।
सामाजिक बंधनों को चुनौती
तीजन बाई का जन्म छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में पारधी जनजाति में हुआ था। उन्होंने लोक कला के क्षेत्र में एक ऐसी लकीर खींची जिसे मिटाना नामुमकिन है:
जब तीजन बाई ने महज 13 साल की उम्र में अपनी पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी, तब महिलाएं बैठकर शांत भाव से ‘वेदमती शैली’ में पंडवानी गाती थीं।
तीजन बाई ने पुरुषों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए ‘कापालिक शैली’ को चुना। वह हाथ में तंबूरा लेकर, खड़े होकर, अपनी गरजती हुई दमदार आवाज और अनूठे हाव-भाव के साथ महाभारत के प्रसंगों (विशेषकर भीम के शौर्य) का जीवंत वर्णन करती थीं।
छत्तीसगढ़ के छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने इंदिरा गांधी से लेकर जापान और पेरिस तक दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्षों के सामने प्रस्तुतियां दीं और पंडवानी को वैश्विक मंच पर स्थापित किया।
सम्मान और गौरव थीं
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा, “श्रीमती तीजन बाई हम लोगों के बीच नहीं रहीं। वे विख्यात पंडवानी गायिका थीं। पद्मश्री व पद्म विभूषण जैसे सम्मानों से सम्मानित थीं। तीजन बाई छत्तीसगढ़ का सम्मान और गौरव थीं इसलिए उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगा।”
पीएम ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मशहूर पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट किया, “सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति!”
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