लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित सैयद सालार मसूद गाजी (गाजी मियां) की दरगाह में पिछले 20 वर्षों के दौरान करोड़ों रुपये के चढ़ावे, चंदे और वक्फ संपत्तियों के वित्तीय गबन का मामला सामने आया है। यह विवाद जून, 2026 में तब और गहरा गया, जब जांच में दरगाह प्रबंधन के पिछले 10 सालों के वित्तीय रिकॉर्ड ही गायब मिले।

घोटाले के मुख्य आरोप
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि दरगाह में हर साल देश-विदेश से आने वाले लाखों जायरीन करोड़ों रुपये नकद, सोने और चांदी के आभूषण चढ़ाते हैं। दरगाह प्रबंधन (इंतजामिया कमेटी) ने आधिकारिक तौर पर सालाना आय केवल ₹14 से ₹15 करोड़ दिखाई है, जबकि वास्तविक चढ़ावा इससे कहीं अधिक है।
20 साल का गबन
आरोप है कि पिछले 20 वर्षों में दरगाह के चढ़ावे और वक्फ संपत्तियों का इस्तेमाल कर सैकड़ों करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि दरगाह कमेटी में समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक यासिर शाह और सपा से जुड़े कई नेताओं का सीधा दखल है। चढ़ावे की इस मोटी रकम का राजनीतिक इस्तेमाल और बंदरबांट की गई है।
मंत्री का सख्त रुख
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यूपी सरकार के प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने बहराइच के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच करने और 15 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे।
जांच में बड़ा खुलासा
बहराइच के जिला मजिस्ट्रेट अक्षय त्रिपाठी द्वारा कराई गई प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दरगाह प्रबंधन कमेटी वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और खाते पेश नहीं कर पाई। कमेटी के पिछले 10 सालों के वित्तीय रिकॉर्ड गायब हैं।
बोर्ड को सिफारिश
पर्याप्त दस्तावेज और हिसाब-किताब न मिलने के कारण जिला प्रशासन ने दरगाह के पिछले 10 वर्षों के सभी वित्तीय पहलुओं की गहराई से फॉरेंसिक और लीगल जांच कराने के लिए उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड को आधिकारिक सिफारिश (रिकमेंडेशन) भेजी है।
SIT जांच की मांग
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने इस मामले की निष्पक्षता से जांच के लिए मुख्यमंत्री से विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की है। कुछ स्थानीय शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन और वक्फ बोर्ड से न्याय न मिलने की बात कहते हुए इस मामले को लेकर हाई कोर्ट में भी याचिका दायर कर रखी है।
कमेटी का पक्ष
दरगाह की इंतजामिया कमेटी के पदाधिकारियों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि दरगाह के सभी काम और खर्च पूरी पारदर्शिता के साथ नियमानुसार किए जाते हैं और यह आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। फिलहाल वक्फ बोर्ड और प्रशासन की आगामी रिपोर्ट पर ही अंतिम कार्रवाई टिकी हुई है।
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