

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में ‘Telegram’ पर बैन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार ने ‘Telegram’ को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
केंद्र सरकान ने सुनवाई के दौरान Telegram को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि Telegram अब आतंकवादी गतिविधियों, साइबर अपराध, ड्रग तस्करी, वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य अवैध कार्यों के लिए ‘सबसे सुविधाजनक प्लेटफॉर्म’ बन गया है।

यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें Telegram ने भारत सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती दी है। केंद्र सरकार ने हाल ही में NEET-UG 2026 पुनर्परीक्षा से पहले Telegram पर अस्थायी रोक लगाई थी। सरकार का आरोप है कि परीक्षा में नकल और पेपर लीक से जुड़े संगठित गिरोह इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे थे।
सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा कि Telegram की गोपनीयता और बड़े समूहों वाली सुविधाओं का दुरुपयोग अपराधी तत्व कर रहे हैं। सरकार के अनुसार, प्लेटफॉर्म का उपयोग आतंकवाद, साइबर अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, बाल शोषण संबंधी सामग्री के प्रसार और वित्तीय ठगी जैसे मामलों में किया जा रहा है। इसी वजह से सरकार ने इसे “नया डार्क वेब” तक बताया।

एक दिन पहले हुई सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कहा था कि सरकार के पास ऐसे “चौंकाने वाले तथ्य” हैं, जिन्हें वह अदालत के समक्ष रखेगी। उन्होंने कहा कि जब एक संदिग्ध चैनल बंद किया जाता है, तब तुरंत दूसरा चैनल शुरू हो जाता है। QR कोड के जरिए भुगतान लेकर अवैध गतिविधियां जारी रखी जाती हैं।
Telegram ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि पूरे प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करना अनुचित और असंगत कदम है। कंपनी का दावा है कि इस प्रतिबंध से भारत के लगभग 15 करोड़ उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं। Telegram का कहना है कि कुछ लोगों के दुरुपयोग के कारण पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना तक पहुंच के अधिकार का उल्लंघन है।
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