अखिलेश का कॉर्पोरेट दांव: कांग्रेस को मात या योगी को शह?

झारखंड राजनीति
Spread the love

राकेश कुमार

जमशेदपुर। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव ने राज्य के राजनीतिक पारे को चरम पर पहुंचा दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जहां अपने पत्तों को खोलना अभी बाकी रखा है, वहीं समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने दो उम्मीदवारों—प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी का नामांकन दाखिल कराकर हर किसी को चौंका दिया है।

इस सियासी घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा धनराज परिमल नाथवानी की एंट्री को लेकर हो रही है। धनराज नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और झारखंड से चौथी बार राज्यसभा सांसद बने परिमल नाथवानी के बेटे हैं। परिमल नाथवानी की छवि कॉर्पोरेट जगत के साथ-साथ भाजपा और एनडीए नेतृत्व के करीबियों में मानी जाती है। ऐसे में अखिलेश यादव द्वारा एक प्रमुख कॉर्पोरेट घराने से जुड़े व्यक्ति को उच्च सदन भेजने के फैसले पर कई तरह के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

क्या है अखिलेश का गणित:

‘रसद पानी’ की जुगत या सियासी रणनीति?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने ‘रसद-पानी’ यानी चुनावी संसाधन जुटाने के मकसद से कॉर्पोरेट जगत के चेहरे पर दांव लगाया है। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि इस नए समीकरण का सीधा असर किसके खेल पर पड़ेगा?

क्या कांग्रेस के खिलाफ है यह रणनीति?

एक विश्लेषणात्मक थ्योरी के मुताबिक, सपा प्रमुख इस कॉर्पोरेट जुड़ाव के जरिए विधानसभा चुनाव में खुद को आर्थिक और रणनीतिक रूप से इतना मजबूत कर लेना चाहते हैं कि उन्हें कांग्रेस के दबाव में न झुकना पड़े। दिल्ली में आयोजित ‘इंडी’ (INDIA) गठबंधन की बैठक से अखिलेश यादव का दूरी बनाना और उसी दिन लखनऊ में अपने दोनों उम्मीदवारों का नामांकन कराना इस थ्योरी को बल देता है।

क्या योगी आदित्यनाथ की घेराबंदी है मकसद?

यदि अखिलेश यादव कॉर्पोरेट समर्थन और मजबूत संसाधनों के बल पर उत्तर प्रदेश चुनाव में पूरी ताकत से उतरते हैं, तो इसका सीधा प्रभाव राज्य की सत्ता पर काबिज भाजपा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वोट बैंक पर पड़ेगा। योगी आदित्यनाथ को राष्ट्रीय राजनीति और प्रधानमंत्री पद के भावी दावेदारों के रूप में देखा जाता है। ऐसे में यूपी में सपा की मजबूती सीधे तौर पर योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक स्थिति को चुनौती देगी।

एक तीर से दो निशाने?

सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि क्या कोई कॉर्पोरेट कैंडिडेट के जरिए दोनों धड़ों को एक साथ साधने की कोशिश की गई है?

यदि सपा यूपी में संसाधन-संपन्न होकर चुनाव लड़ती है, तो वह कांग्रेस की बैसाखियों से मुक्त होकर अपनी शर्तों पर राजनीति करेगी।

वहीं दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में सपा का उभार भाजपा और योगी आदित्यनाथ के लिए सीधी चुनौती पेश करेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह दांव न केवल उत्तर प्रदेश के चुनावी गणित को नया मोड़ दे सकता है, बल्कि आने वाले समय में केंद्र और राज्य के शक्ति-संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।

हमारे साथ जुड़ें

व्‍हाट्सएप ग्रुप
https://chat.whatsapp.com/H5n5EBsvk6S4fpctWHfcLK

स्‍वदेशी एप ग्रुप
https://chat.arattai.in/groups/t43545f313238383036363337343930333731343936395f32303030323937303330392d4743

यहां सीधे पढ़ें खबरें

खबरें और भी हैं। इसे आप अपने न्‍यूज वेब पोर्टल dainikbharat24.com पर सीधे भी जाकर पढ़ सकते हैं। नोटिफिकेशन को अलाउ कर खबरों से अपडेट रह सकते हैं। साथ ही, सुविधा के मुताबिक अन्‍य खबरें भी पढ़ सकते हैं।

आप अपने न्‍यूज वेब पोर्टल से फेसबुक, इंस्‍टाग्राम, X, स्‍वदेशी एप arattai सहित अन्‍य सोशल मीडिया पर भी जुड़ सकते हैं। खबरें पढ़ सकते हैं। सीधे गूगल हिन्‍दी न्‍यूज पर जाकर खबरें पढ़ सकते हैं। अपने सुझाव या खबरें हमें dainikbharat24@gmail.com पर भेजें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *