रांची। सीएमपीडीआई को जियोग्राफिक इंफॉरमेशन सिस्टम (जीआईएस) और जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी के इनावेटिव इस्तेमाल के लिए सम्मानित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित ईसरी इंडिया यूजर कांफ्रेंस 2026 में 2 सितम्बर, 2026 को यह सम्मान कंपनी को मिला।
सीएमपीडीआई मजबूत स्थानिक निर्णय-समर्थन समाधान (रोबस्ट स्पेशियल डिसिजन-सपोर्ट सौल्यूशन) देने के लिए एडवांस्ड जीआईएस, सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग और यूएवी/ड्रोन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है।
इसके मुख्य कामों में सटीक खदान योजना और सर्वेक्षण, ब्लॉक सीमा का निर्धारण करना, पर्यावरण और भूमि उपयोग की निगरानी, भूमि पुनरूद्धार (लैंड रिक्लेमेशन) से जुड़ी स्टडी और बस्ती/अधिवास की मानचित्रण करना शामिल हैं।
अपनी तकनीकी क्षमता की बदौलत सीएमपीडीआई ने बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों के लिए ड्रोन-आधारित रेत की पुनःपूर्ति (सैंड रिप्लेशमेंट) का अध्ययन सफलतापूर्वक पूरा किया है।
मानसून से पहले और बाद के डिजिटल टेरेन मॉडल (डीटीएम) का विश्लेषण करके, संस्थान द्वारा नदी के तल में मौजूद रेत की मात्रा का बहुत अत्यन्त सटीक आकलन किया जाता है।
हाई-रिजॉल्यूशन सैटेलाइट और ड्रोन डेटा से बस्तियों की सटीक मानचित्रण और भू-भाग मूल्यांकन को सक्षम बनाते हैं, जबकि अलग-अलग समय की तस्वीरें (मल्टी टेम्पोरल इमेजरी), माइनिंग से प्रभावित इलाकों में जमीन को फिर से ठीक करने के काम की लगातार निगरानी को सुविधाजनक बनाती है।
यह सम्मान खनन, भू-विज्ञान, सर्वेक्षण और पर्यावरण प्रबंधन में अपनी विशेषज्ञता के साथ आधुनिक जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी को जोड़ने में सीएमपीडीआई की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है। साथ ही यह खनन और विकास से जुड़े अन्य कामों के लिए कई तरह के जीआईएस-आधारित समाधान भी देता है।
सीएमपीडीआई की ओर से मुख्य प्रबंधक (भूविज्ञान) श्रीमती अनिंदिता बिस्वास, प्रबंधक (भूविज्ञान) तन्मय प्रामाणिक, उप प्रबंधक (सर्वे) सुभोमय सिन्हा एवं उप प्रबंधक (खनन) स्वाभिमान डहेरिया ने भाग लिया।
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