18 गांवों की मसाला समूहों की बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा

झारखंड
Spread the love

  • स्वयं सहायता समूहों से बदलेगी गांव की तस्वीर :  डॉ मयंक मुरारी

रांची। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्थायी आय सृजन और उद्यमिता से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। इसके लिए कृषि, हस्तशिल्प, वन उत्पाद, जूट, बांस और अन्य स्थानीय संसाधन आधारित गतिविधियों में प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव को बढ़ावा देने की जरूरत है। यह बात उषा मार्टिन फाउंडेशन के हेड डॉ मयंक मुरारी ने कही।

डॉ मुरारी शनिवार को उषा मार्टिन सभागार में नामकुम और अनगड़ा प्रखंड से आई महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए ‘स्वयं सहायता समूह का संचालन एवं उद्यमिता’ विषय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

डॉ मुरारी ने कहा कि झारखंड के आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह समुदाय आधारित आर्थिक परिवर्तन के महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं। ये समूह महिलाओं को केवल बचत और ऋण से नहीं जोड़ते, बल्कि उनमें नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की क्षमता और उद्यमशीलता का विकास भी करते हैं।

डॉ मुरानी ने कहा कि ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनके माध्यम से विकास और आर्थिक गतिविधियों को गांव के स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।

प्रशिक्षक अंजली कुमारी ने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए लाह उत्पादन, जूट और बांस आधारित उद्यमों का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्हें सरकारी योजनाओं और वित्तीय संस्थाओं से उपलब्ध सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए भी प्रयास जरूरी है।

प्रशिक्षक ने कहा कि किसी भी स्वयं सहायता समूह को मजबूत बनाने के लिए नियमित बैठक, पारदर्शी संचालन, सामूहिक निर्णय और सामाजिक मुद्दों पर निरंतर चर्चा आवश्यक है। इससे समूह सक्रिय और गतिशील बना रहेगा।

मेवालाल ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को जंगल और वन उत्पाद आधारित उद्यमों से जोड़ने की व्यापक संभावनाएं हैं। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल पर आधारित प्रशिक्षण और उद्यम विकसित किए जाएं तो उत्पादन की लागत कम होगी और महिलाओं के लिए रोजगार के स्थायी अवसर भी पैदा होंगे।

उषा मार्टिन फाउंडेशन की संगीता कुमारी ने बताया कि कंपनी के सहयोग से तीन स्वयं सहायता समूह संचालित किए जा रहे हैं। इनमें सोहराई कला, जूट उत्पाद और बांस से निर्मित सामग्री तैयार कर महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल को अब सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तारित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

मोनीत बूतकुमार ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं के रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए बैंक लिंकेज के माध्यम से कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की जा सकती है। इससे महिलाएं छोटे उद्यम शुरू कर अपनी आय बढ़ाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर सकेंगी।

कार्यक्रम में पूजा देवी, दीपमाला देवी, शिखा देवी, शोभा देवी, अंजनी देवी, नीतू देवी, प्रियंका कुमारी, कांति कुजूर, सोनी देवी, नीलू तांब, सुमित्रा देवी, गीता देवी सहित विभिन्न स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं उपस्थित थीं।

हमारे साथ जुड़ें

व्‍हाट्सएप ग्रुप
https://chat.whatsapp.com/H5n5EBsvk6S4fpctWHfcLK
स्‍वदेशी एप ग्रुप
https://chat.arattai.in/groups/t43545f313238383036363337343930333731343936395f32303030323937303330392d47437c3031303131353032363138323137353934323036313934393230

यहां सीधे पढ़ें खबरें

खबरें और भी हैं। इसे आप अपने न्‍यूज वेब पोर्टल dainikbharat24.com पर सीधे भी जाकर पढ़ सकते हैं। नोटिफिकेशन को अलाउ कर खबरों से अपडेट रह सकते हैं। साथ ही, सुविधा के मुताबिक अन्‍य खबरें भी पढ़ सकते हैं।

आप अपने न्‍यूज वेब पोर्टल से फेसबुक, इंस्‍टाग्राम, X, स्‍वदेशी एप arattai सहित अन्‍य सोशल मीडिया पर भी जुड़ सकते हैं। खबरें पढ़ सकते हैं। सीधे गूगल हिन्‍दी न्‍यूज पर जाकर खबरें पढ़ सकते हैं। अपने सुझाव या खबरें हमें dainikbharat24@gmail.com पर भेजें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *