भारतीय मजदूर संघ का 17 अगस्त को देशभर में राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन

झारखंड
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  • पुरानी और न्यूनतम पेंशन बढ़ाने समेत रखीं 12 मुख्य मांगें

रांची। भारतीय मजदूर संघ की केंद्रीय कार्य समिति ने देश भर में मजदूरों की लंबे समय से लंबित समस्याओं और मांगों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए 17 अगस्त, 2026 को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया है। रांची में आयोजित केंद्रीय कार्य समिति की बैठक में संघ की सभी 28 राज्य इकाइयों और 42 औद्योगिक फेडरेशनों को निर्देश दिया गया है कि वे जिला मुख्यालयों पर विशाल प्रदर्शन, रैलियां और धरने आयोजित करें। इस दौरान जिला अधिकारियों (डीएम/कलेक्टर) के माध्यम से प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और श्रम मंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

नए लेबर कोड्स का विरोध

बीएमएस ने इंडस्ट्रीयल रिलेशंस कोड (IR Code) और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड (OSH&WC Code) के मजदूर-विरोधी प्रावधानों का कड़ा विरोध किया है। संघ ने सरकार से मांग की है कि वह केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ वार्ता शुरू करे। इन कोड्स में आवश्यक संशोधन करे।

पुनर्विचार करना चाहिए

बीएमएस के महासचिव सुरेंद्र कुमार पांडे ने कहा कि सरकार को “स्कीम वर्कर” की पुरानी अवधारणा पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि 1975 में शुरू हुई आंगनवाड़ी योजना को आधी सदी (50 साल) बीत जाने के बाद भी “स्कीम” कैसे कहा जा सकता है? इन कार्यकर्ताओं से 12 घंटे से अधिक काम लिया जाता है, लेकिन सरकार उन्हें ‘कर्मचारी’ (Worker) मानने को तैयार नहीं है और न ही इन्हें श्रम कोड में शामिल किया गया है।

बीएमएस ने केंद्र सरकार से मांग की है कि 1 करोड़ से अधिक स्कीम वर्करों के भविष्य और सुरक्षा के लिए केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ चर्चा कर एक ठोस एवं विशेष नीति बनाई जाए।

संघ की प्रमुख मांगें

EPS 95 पेंशनभोगियों के लिए न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 प्रति माह किया जाए। साथ ही इसे वीडीए (VDA) और आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जाए।

ESI पात्रता की वेतन सीमा को ₹21,000 से बढ़ाकर ₹42,000 किया जाए।

EPF की सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹30,000 की जाए।

नए श्रम कोड के अनुसार सभी कर्मचारियों को पूरे वेतन पर बोनस दिया जाए। बोनस गणना की सीमा ₹7,000 से बढ़ाई जाए। 

ग्रेच्युटी की गणना 15 दिन के बजाय 30 दिन के वेतन के आधार पर बिना किसी सीमा (Ceiling) के की जाए। 

बढ़ती महंगाई को देखते हुए न्यूनतम वेतन तय करने का नया फार्मूला बनाया जाए। 

आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ता, मिड-डे मील वर्कर और एनएचएम (NHM) कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाया जाए। 

सभी संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए।

वेतन चोरी और श्रमिकों के शोषण में शामिल ठेकेदारों और मैनपावर एजेंसियों को सख्त सजा दी जाए। 

बैंकिंग क्षेत्र में 5-दिवसीय कार्य प्रणाली (5-day banking) लागू की जाए।

सभी सरकारी विभागों एवं सेवाओं में खाली पड़े पदों को तुरंत भरा जाए। 

पुरानी पेंशन योजना (OPS) को तुरंत बहाल किया जाए तथा जल्द से जल्द ‘भारतीय श्रम सम्मेलन’ (Indian Labour Conference) आयोजित किया जाए।

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