नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप में लागू 47 वर्ष पुराने कानून को समाप्त कर दिया है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यह कदम उठाया है। इसका विरोध भी शुरू हो गया है।
क्या था पुराना कानून
वर्ष, 1979 में Lakshadweep Prohibition Regulation, 1979 लागू किया गया था। उस समय स्थानीय मुस्लिम बहुल आबादी की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लगभग पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी। लक्षद्वीप की लगभग 97% आबादी मुस्लिम है।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से कुछ सरकारी रिसॉर्ट्स और चुनिंदा पर्यटन स्थलों पर सीमित रूप से शराब परोसने की अनुमति थी।
नए कानून में ये
नए नियमों के तहत शराब की बिक्री पूरी तरह मुक्त नहीं होगी, बल्कि लाइसेंस के जरिए नियंत्रित होगी। सरकारी निगम और एजेंसियां भी खुदरा बिक्री के लिए लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगी। 21 वर्ष से कम आयु के लोगों को शराब बेचने पर रोक रहेगी।
प्रशासन आवश्यकता पड़ने पर किसी क्षेत्र में फिर से शराबबंदी लागू कर सकेगा। शराब खरीद और उपभोग की सीमा तय करने का अधिकार प्रशासन के पास रहेगा।
पर्यटन को बढ़ावा
केंद्र सरकार का तर्क है कि यह बदलाव लक्षद्वीप को एक वैश्विक समुद्री और बीच पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। सरकार का मानना है कि नियंत्रित शराब बिक्री से पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
एक्साइज ड्यूटी लागू
नई व्यवस्था में शराब पर ऊंची एक्साइज ड्यूटी लगाई गई है। इसमें IMFL और विदेशी शराब पर 400% तक, बीयर पर 200%, वाइन पर 80% एक्साइज ड्यूटी लगाई गई है। इसका उद्देश्य बिक्री को नियंत्रित रखना और राजस्व जुटाना बताया गया है।
विरोध भी शुरू
इस फैसले का कुछ स्थानीय नेताओं और सामाजिक संगठनों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि शराब की उपलब्धता बढ़ने से सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव पड़ सकते हैं। इससे पहले भी लक्षद्वीप के सांसद M. Hamdullah Sayeed प्रशासन को शराब उपलब्धता बढ़ाने के खिलाफ पत्र लिख चुके हैं।
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