- किसी भी स्टोर से किया जा सकेगा पुस्तकों का क्रय
- उपायुक्त ने की जिला स्तरीय शुल्क समिति की बैठक
विश्वजीत कुमार रंजन
गढ़वा। उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा की अध्यक्षता में शुक्रवार को समाहरणालय के सभाकक्ष में जिला स्तरीय शुल्क समिति की बैठक हुई। इसमें जिला शुल्क समिति के सदस्य जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, निजी विद्यालयों के संचालकों, विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक, जनप्रतिनिधि एवं विद्यार्थियों के अभिभावक आदि उपस्थित रहें।
जिला अंतर्गत विभिन्न निजी विद्यालयों द्वारा मासिक ट्यूशन फी, वार्षिक एनुअल फी समेत री-एडमिशन आदि शुल्कों को लेकर आ रही शिकायतों के निबटारे के लिए बैठक हुई। इसमें विद्यालय, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों के हितों में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक के दौरान विभिन्न विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों ने बताया कि किसी भी प्रकार का अधिक शुल्क नहीं लिया जाता है। एडमिशन चार्ज प्रथम बार ही लिया जाता है। वार्षिक शुल्क (एनुअल फी) के बारे में तर्क देते हुए बताया गया कि एनुअल फी के अंतर्गत परीक्षा शुल्क, विद्यालयों का बेहतर रखरखाव, शिक्षकों को पीएफ एवं ग्रेच्युटी, होल्डिंग टैक्स, इलेक्ट्रिक बिल, साफ सफाई एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं को बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
मौके पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों द्वारा कुछ विषयों पर आपत्ति जताई गई। कहा गया कि विद्यालयों में सुविधा के अनुरूप फी की बढ़ोतरी हो, पर अभिभावकों का भी ख्याल रखना उचित होगा। उन पर अधिक आर्थिक दबाव नहीं पड़े। इस दौरान विद्यालयों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने-अपने विचार व समस्यायें साझा किए गए।
जिला शिक्षा पदाधिकारी कैसर रजा एवं जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज द्वारा झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 से अवगत कराया गया। निजी विद्यालय में शुल्क समिति के गठन के विषय में बताते हुए कहा कि शुल्क समिति द्वारा निर्धारित शुल्क दो वर्षों के लिए प्रभावी होगी। यदि समिति द्वारा तय मूल्य में वृद्धि पिछले वर्ष के शुल्क के 10% से अधिक है, तो मामले को जिला समिति को अनुमोदन के लिए भेजना आवश्यक होगा।
निर्धारित शुल्क के विरूद्ध विद्यालय स्तरीय शुल्क समितियों प्रबंधन द्वारा निर्दिष्ट किये गये मामले में निर्णय लेने के लिए जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है। किसी भी विद्यालय द्वारा ट्यूशन फी मे वार्षिक वृद्धि 10% से अधिक नहीं करने एवं अपर लिमिट एनुअल फी में ट्यूशन फी के 15% से अधिक की वृद्धि नहीं करने की बात बताई गई।
इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। सभी पक्षों के विचार एवं समस्याओं को सुनते हुए उपायुक्त द्वारा निजी विद्यालयों के संचालक, प्रधानाध्यापक, शिक्षक एवं अभिभावक और विद्यार्थियों के हितों में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उन्होंने ट्यूशन फी एवं एनुअल फी के बारे में उपरोक्त नियमावली के बिंदु के अनुरूप ही ट्यूशन फी एवं एनुअल फी निर्धारित करने की बात कही।
एनुअल फी का ब्रेकअप स्पष्ट रूप से दर्शाने की बात कही गई। किसी भी प्रकार का हिडेन फी (छुपा हुआ शुल्क) नहीं लगाने का निर्देश दिया गया। उन्होंने विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से केवल ट्यूशन फी एवं एनुअल फी के रूप में ही शुल्क लेने की बात कही।
इसके अतिरिक्त प्राप्त विभिन्न शिकायतों के निष्पादन के लिए निर्णय लेते हुए कहा कि किसी भी निजी विद्यालय में 5 साल के अंदर यूनिफॉर्म नहीं बदले जाएं। पुस्तकों की खरीदारी किसी भी चिन्हित बुक स्टोर से ना करके अपने सुविधा अनुसार अभिभावक पुस्तकों की खरीदारी किसी भी बुक स्टोर से कर सकेंगे। इस पर किसी भी प्रकार की बाध्यता नहीं होनी चाहिए।
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