रांची। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के डीन डॉ डीके शाही ने कहा है कि धर्म, संस्कृति, आस्था और स्वाभिमान की रक्षा के लिए खालसा संस्थापक गुरु गोविन्द सिंह के चारों नाबालिग पुत्रों (साहिबजादों) का बलिदान भारतीय इतिहास में बच्चों और युवाओं के लिए अमर प्रेरणा का स्रोत है।
विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा शुक्रवार को आयोजित वीर बाल दिवस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह दिवस हमें गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबज़ादों के अद्वितीय साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति का पुण्य स्मरण कराता है।
यह दिवस हमें यह सिखाता है कि साहस उम्र का मोहताज नहीं होता I यह दिन केवल सिख समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा और साहस का प्रतीक है। यह बच्चों को ईमानदारी, निडरता और बलिदान महत्व समझाता है।
गुरुगोबिंद सिंह के दो बड़े साहिबजादा- अजित सिंह और जुझार सिंह अत्याचार के खिलाफ मुगल सेना से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुएथे जबकि तमाम धमकी, प्रलोभन और दवाव के बावजूद धर्म बदलने को तैयार नहीं होने पर दो छोटे साहिबजादा- जोरावर सिंह और फतेह सिंह को मुग़ल शासकों द्वारा दीवारों में चुनवा दिया गया था।
इस अवसर पर दो विद्यार्थियों- रूद्र प्रताप साहू और आस्था सिंह ने भी साहिबजादों के पराक्रम के प्रति अपने विचार रखे। संचालन डॉ सुरभि सिन्हा एवं धन्यवाद डॉ बीके झा ने किया।
देश के बच्चों और युवाओं को साहिबजादों के बलिदान से परिचित कराने एवं उनकी साहस-शौर्य के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2022 में यह घोषणा की कि हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाएगा।
विभिन्न राज्यों में बेहतरीन और बहादुरी के कामों के लिए चयनित बच्चों को राष्ट्रपति द्वारा इस दिन ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाता है।
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