
गोवा। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और तीन बार के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर सुबह करीब 5.20 बजे दिल का दौरा पड़ने (कार्डिएक अरेस्ट) से निधन हो गया।
वे 75 वर्ष के थे। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने इस दुखद खबर की पुष्टि की। नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आते ही बॉलीवुड समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
नाना पाटेकर न केवल अपनी सशक्त और जानदार अदाकारी के लिए जाने जाते थे, बल्कि समाज सेवा और भारतीय सेना के प्रति उनके निस्वार्थ समर्पण ने भी उन्हें देशवासियों के दिल में एक खास जगह दिलाई।
नाना पाटेकर भारतीय सेना की टेरिटोरियल आर्मी का हिस्सा रहे थे। वे पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए लगातार फंड जुटाते रहते थे।
हालांकि, सेना के प्रति उनका प्रेम केवल सामाजिक कार्यों तक सीमित नहीं था; उन्होंने असल जंग के मैदान में उतरकर इतिहास रचा था।
1999 के कारगिल युद्ध के दौरान, जब भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच युद्ध छिड़ा हुआ था, तब नाना पाटेकर ने अपने अभिनय करियर को रोक दिया था।
90 के दशक की शुरुआत में अपनी फिल्म ‘प्रहार’ की पटकथा लिखते समय उन्होंने ‘मराठा लाइट इन्फैंट्री’ के जवानों के साथ तीन साल तक कठिन प्रशिक्षण लिया था। उनके साथ वक्त बिताया था।
हाल ही में जब नाना पाटेकर ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में अमिताभ बच्चन के सामने पहुंचे थे, तब उन्होंने कारगिल युद्ध से जुड़ा यह ऐतिहासिक किस्सा साझा किया था।
उन्होंने बताया था कि जब 1999 में युद्ध शुरू हुआ, तब उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से संपर्क कर मोर्चे पर जाने की इच्छा जताई।
हालांकि, अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से उन्हें मना कर दिया। कहा कि इसके लिए केवल देश के रक्षा मंत्री ही विशेष अनुमति दे सकते हैं।
इसके बाद नाना पाटेकर ने सीधे तत्कालीन रक्षा मंत्री से संपर्क किया। विशेष अनुमति लेकर कारगिल युद्ध के मोर्चे पर भारतीय जवानों का हौसला बढ़ाने पहुंचे थे।
अपनी बेबाक अदाकारी, देशप्रेम और मानवतावादी कार्यों के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर का जाना भारतीय कला और राष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
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