रांची। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के तीन वरिष्ठ शिक्षकों ने शनिवार को अवकाश ग्रहण किया। कुलपति डॉ एससी दुबे की अध्यक्षता में आरएसी प्रेक्षागृह में आयोजित विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इसमें उनके सहकर्मियों और विद्यार्थियों ने उनके वैज्ञानिक ज्ञान, प्रशासनिक क्षमता और मानवीय गुणों को याद किया। उनके स्वस्थ, सुदीर्घ आयुष्य की कामना की।
आनुवंशिकी एवं पौधा प्रजनन विभाग की अध्यक्ष डॉ मणिगोपा चक्रवर्ती ने लगभग चार दशकों की सेवा के उपरांत अवकाश प्राप्त किया। उन्होंने बीएयू से ही कृषि विज्ञान में बीएससी और एमएससी की डिग्री और राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। वर्ष 1987 में यहीं वरीय तकनीकी सहायक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की।
सन् 1990 में सहायक प्राध्यापक और 2008 में यूनिवर्सिटी प्रोफेसर बनीं। मक्का, चना, उड़द और चावल के 10 उन्नत प्रभेद विकसित किये। मक्का संबंधी अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना की 21 वर्षों तक प्रधान अन्वेषक रहीं। कॉलेज ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी के एसोसिएट डीन के अतिरिक्त दायित्व का भी निर्वहन किया।
प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में इनके लगभग 180 शोध पत्र प्रकाशित हैं। इनके मार्गदर्शन में 12 छात्र-छात्राओं ने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। रांची एग्रीकल्चर कॉलेज पूर्ववर्ती विद्यार्थी संघ के अध्यक्ष, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष और इंडियन सोसाइटी ऑफ जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग के रांची चैप्टर के सचिव के रूप में भी कार्य किया।
सस्य विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ शंभूनाथ करमाकर ने बीएयू के साथ अपने सफर की शुरुआत जुलाई 1989 में क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, दारिसाइ (पूर्वी सिंहभूम) में कनीय वैज्ञानिक के रूप में की। सेवा में रहते हुए सन् 1998 में आईआईटी, खड़कपुर से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। वर्ष 2010 में मुख्य वैज्ञानिक सह यूनिवर्सिटी प्रोफेसर बने। पिछले 4 वर्षों से वह निदेशक (बीज एवं प्रक्षेत्र) का भी कार्यभार संभाल रहे थे। उनकी तीन पुस्तकें एवं प्रतिष्ठित जर्नल में 100 शोधपत्र प्रकाशित हैं। कुल 6 विद्यार्थियों ने उनके निर्देशन में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की।
मृदा विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अरविन्द कुमार, जो कृषि महाविद्यालय, गढ़वा के एसोसिएट डीन का भी अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। वह 2004 में सहायक प्राध्यापक और वर्ष 2000 में एसोसिएट प्रोफेसर बने थे।
इस वर्ष जून में रिटायर हुए मृदा विज्ञान विभाग के मुख्य वैज्ञानिक डॉ पीबी साहा को भी शनिवार को विदाई दी गई। वह 1989 में क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, दुमका में कनीय वैज्ञानिक तथा वर्ष 2008 में मुख्य वैज्ञानिक सह यूनिवर्सिटी प्रोफेसर बने थे। उन्होंने जेडआरएस, दुमका के सह निदेशक और बागवानी महाविद्यालय, खूंटपानी, चाईबासा के सह निदेशक का भी प्रभार सम्भाला।
डॉ वीरेंद्र कुमार मेहता, वैज्ञानिक (कृषि अभियंत्रण), कृषि विज्ञान केंद्र, दुमका, संगीता विजया, लिपिक, कुलसचिव कार्यालय और शांति देवी, स्वीपर, संपदा कार्यालय ने भी शनिवार को विश्वविद्यालय सेवा से अवकाश प्राप्त किया। संबंधित कार्यालयों में उनके लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया।
इन्हें मिला नया प्रभार
क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी, पलामू के प्रभारी सह निदेशक डॉ अखिलेश साह कृषि महाविद्यालय, गढ़वा के एसोसिएट डीन का प्रभार देखेंगे। डॉ मो परवेज आलम एग्रोनामी विभाग के अध्यक्ष तथा डॉ नीरज कुमार आनुवंशिकी एवं पौधा प्रजनन विभाग के अध्यक्ष का कार्यभार संभालेंगे।
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