विश्वजीत कुमार रंजन
गढ़वा। वर्ष 2011 के बाद साल 2027 में जनगणना का कार्य किया जाना है। देश में करीब 15 साल बाद जनगणना-2027 की प्रक्रिया शुरू होने जा रही। यह पूरी तरह से डिजिटल (ऐप-आधारित) होगी। जनगणना दो चरणों में की जानी है। प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकान की गणना होगी। यह 16 मई से 14 जून, 2026 तक चलेगी। उक्त जानकारी अपर समाहर्ता-सह-जिला जनगणना पदाधिकारी राज महेश्वरम ने गुरुवार को मीडिया को दी।
श्री महेश्वरम ने बताया कि द्वितीय चरण में जनसंख्या गणना की जाएगी, जो माह फरवरी 2027 से शुरू होगी। उन्होंने बताया कि जनगणना के इतिहास में पहली बार दो चीजें लागू की गई है। पहला, स्व-गणना 1 से 15 मई, 2026 और दूसरा, डिजिटल ऐप के माध्यम से गणना का प्रावधान किया गया है।
जिला जनगणना पदाधिकारी ने बताया कि प्रथम चरण में जनगणनाकर्मी 33 सवाल पूछेंगे। इनमें भवन संख्या, जनगणना गृह संख्या, फर्श-दीवार-छत की निर्माण सामग्री का उपयोग और स्थिति जैसी जानकारी शामिल है। परिवार में रहने वाले कुल सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम और लिंग, मुखिया की जाति (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य), मकान का मालिकाना हक, रहने वाले कमरों की संख्या और घर में विवाहित जोड़ों की संख्या, पीने के पानी का मुख्य स्रोत, प्रकाश का स्रोत की जानकारी ली जाएगी।
शौचालय की उपलब्धता और प्रकार, अपशिष्ट की निकासी, स्नान और रसोई की सुविधाएं, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन और खाना पकाने का मुख्य ईंधन शामिल हैं। गणना में रेडियो, टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप/कंप्यूटर, टेलीफोन, मोबाइल, स्मार्टफोन, साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल, कार/जीप/वैन जैसी वस्तुओं के स्वामित्व के बारे में भी पूछा जाएगा। मुख्य रूप से खाए जाने वाले अनाज और जनगणना संपर्क के लिए मोबाइल नंबर भी लिया जाएगा।
जिला जनगणना पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। इसे अदालतों में सबूत के रूप में या सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता। सिर्फ जनगणना के लिए बताये गयें कुल आंकड़ों के लिए ही उपयोग होगा।
उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में आधार कार्ड/पैन कार्ड/बैंक विवरणी अथवा किसी प्रकार का ओटीपी की जानकारी नहीं मांगी जायेगी। आम जनों को ऐसी किसी विवरणी को साझा करने के सम्बंध में सचेत रहने की बात कही।
जनगणना के दौरान जनगणना कार्य में लगे कर्मी को पहचान पत्र उपलब्ध कराई जायेगी, जिसमें क्यूआर कोड भी अंकित रहेगा। इसके माध्यम से उक्त कर्मी की पहचान की जांच की जा सकती है। किसी भी परिस्थिति में गैर-प्राधिकृत व्यक्ति को उक्त सूचनायें साझा नहीं करनी है।
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