- आठवीं अनुसूची को लेकर हुई अहम बैठक
सुजीत कुमार केशरी
पिठोरिया। मोरहाबादी स्थित पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा शोध संस्थान में मुंडारी भाषा समन्वय समिति की महत्वपूर्ण बैठक 13 सितंबर, 2026 को हुई। मुंडारी भाषा को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कराने के उद्देश्य से यह बैठक हुई।
बैठक में झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, असम सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए मुंडारी भाषा के प्रतिनिधियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, भाषा प्रेमियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। बैठक में लगभग 200 से अधिक प्रतिनिधियों एवं मुण्डारी भाषा आंदोलन से जुड़े लोगों की उपस्थिति रही।
बैठक का मुख्य उद्देश्य मुंडारी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए देशव्यापी स्तर पर एक संगठित एवं प्रभावी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करना था। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में मुण्डारी भाषा की स्थिति, उसके संरक्षण, संवर्धन तथा संवैधानिक मान्यता की आवश्यकता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए जनवरी 2027 में एक विशाल मुंडारी भाषा रैली आयोजित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। इस रैली में देश के विभिन्न राज्यों से मुण्डारी भाषी समाज के लोगों को एकजुट करने का लक्ष्य रखा गया है। आयोजकों ने आशा व्यक्त की कि इस विशाल रैली में पांच लाख से अधिक मुण्डारी भाषी लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा उपस्थित रहे। उन्होंने मुंडारी भाषा की संवैधानिक मान्यता के प्रश्न को महत्वपूर्ण बताते हुए भाषा, संस्कृति और आदिवासी पहचान के संरक्षण की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
बैठक में उपस्थित विभिन्न संस्थाओं एवं संगठनों के अध्यक्षों तथा प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव और प्रस्ताव प्रस्तुत किए। प्रमुख रूप से मुंडारी साहित्य परिषद, भारत मुंडा समाज, मुंडा विकास समिति, झारखंड मुंडा समाज, बुंडू; रुम्बुल, रांची; जोरंग, टाटा; मुंडा सभा, रांची; मुंडा होड़ो उत्थान मंच, रांची; सरना सोतोः संगोम समिति, खूंटी; सरना सोतों समिति, डाउगड़ा; अखिल भारतीय सरना समिति, खूंटी, आदिम जाति सेवा मंडल, रांची और मुंडारी भाषा छात्र संघ, रांची सहित अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त अन्य राज्यों से आए प्रतिनिधियों एवं गणमान्य अतिथियों ने भी बैठक में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
बैठक के प्रमुख वक्ताओं में बालकिशन मुंडा (पूर्व आईएएस), रविंद्र नाथ मुंडा, अनिल ओडेया (पूर्व आईएएस), डॉ. सत्यनारायण मुंडा (पूर्व कुलपति), सोमा मुंडा (पूर्व उपनिदेशक, टीआरआई), एतवा मुण्डा (पूर्व आयकर आयुक्त), कुंवर सिंह पाहन (संयुक्त सचिव, शिक्षा विभाग, झारखंड सरकार), नवोज्योति ओडेया (सचिव, एएमसीएस) और मानसिद्ध बड़ायुद (पूर्व प्रोफेसर) सहित अनेक व्यक्तियों ने अपने विचार रखे।
अन्य राज्यों से आए प्रतिनिधियों में छत्तीसगढ़ से शंकर राम बारला और मुनेश्वर भंगेल, ओडिशा से दिगंबर सिंह एवं सुरजन सिंह मुंडा, पश्चिम बंगाल से हिमांशु सिंह मुण्डा, असम से अपूर्वा तमड़िया एवं एतवा मुंडा ने प्रतिनिधित्व किया।
बैठक में अन्य प्रमुख सदस्यों एवं प्रतिनिधियों में शंभू नारायण मुंडा, विलकन डांग, ब्राजेंद्र हेंब्रम, लखींद्र मुंडा, विनसाय मुंडा, दिगंबर मुंडा, नेल्सन ओमेन बागे, सुमित गुड़िया, विनय हास्सा, बसंती कुमारी मुंडा, भारत सिंह, मथुरा कांड़िर, सिलय हास्सा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
विशेष रूप से झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से जुड़े लगभग 45 मुंडारी विषय के सहायक प्राध्यापक, विभिन्न राज्यों से आए लगभग 60 मुंडारी भाषा के शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, भाषा प्रेमी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में सर्वसम्मति से यह विचार सामने आया कि मुंडारी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि मुंडा समुदाय के इतिहास, संस्कृति, परंपरा, लोकज्ञान और सामाजिक पहचान की महत्वपूर्ण धरोहर है। इसलिए इसके संरक्षण, संवर्धन और संवैधानिक मान्यता के लिए संगठित प्रयास आवश्यक हैं।
बैठक के माध्यम से विभिन्न राज्यों में फैले मुण्डारी भाषी समाज को एक मंच पर संगठित करने तथा मुण्डारी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने का संकल्प लिया गया। आगामी जनवरी, 2027 में प्रस्तावित विशाल मुंडारी भाषा रैली को इसी आंदोलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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