कमेटी ने 30 नई फसल किस्मों को जारी करने की दी मंजूरी

झारखंड कृषि मुख्य समाचार
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  • इनमें बीएयू की विकसित 10 प्रभेद भी शामिल 

रांची। झारखंड सरकार ने राज्य में स्थित विभिन्न कृषि शोध संस्थानों द्वारा लगभग एक दशक तक लगातार किए गए अनुसंधान एवं परीक्षणों के बाद विकसित 30 उच्च उत्पादक, शीघ्र पकने वाली, रोग-कीट प्रतिरोधी, तनाव सहनशील एवं जलवायु अनुकूल फसल किस्मों को जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है।

इनमें बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित 10 किस्में भी शामिल हैं। इनमें सोयाबीन और गेहूं की दो-दो, मक्का, फलारू (एरियल याम), अरहर, चारा जई, चारा घास और सरसों की एक-एक किस्म हैं।

बीएयू के कुलपति डॉ एससी दुबे ने बताया कि इन प्रस्तावों को राज्य वेरायटी रिलीज़ कमेटी (एसवीआरसी) ने स्वीकृति प्रदान की। समिति की बैठक गत सप्ताह झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीख पी. की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में आयोजित हुई।

बीएयू द्वारा विकसित जिन किस्मों को जारी करने की स्वीकृति मिली, उनमें बिरसा मक्का हाइब्रिड-1, बिरसा कोंकण फलारू-1 (एरियल याम किस्म), बिरसा सोयाबीन-5, बिरसा सोयाबीन-6, बिरसा अरहर-3, बिरसा ओट-1 (चारा किस्म), बिरसा दीनानाथ-1 (घास), गेहूं की किस्में बिरसा गेहूं-5, बिरसा गेहूं-6 और बिरसा भारत सरसों-1 शामिल हैं।

बैठक में केंद्रीय वर्षा आधारित ऊपराऊं धान अनुसंधान केंद्र, हजारीबाग द्वारा विकसित दो धान किस्मों-सीआर धान-110 और सीआर धान-215 को भी जारी करने की मंजूरी दी गई।

आईसीएआर–पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान केंद्र, फार्मिंग सिस्टम रिसर्च सेंटर फॉर हिल एंड प्लेटो रीजन, पलांडू, रांची द्वारा विकसित आठ किस्मों-स्वर्ण मोहन धान (चावल), स्वर्ण रत्न (टमाटर), स्वर्ण प्रफुल्य (मिर्च), स्वर्ण अतुल्य (शिमला मिर्च), स्वर्ण यामिनी (करेला), स्वर्ण सुगंधा (सब्जी सोयाबीन), स्वर्ण सुपर्णा (चौलाई साग) और स्वर्ण निधि (सेम) को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएबी), रांची की चार धान किस्मों-आईआईएबी धान-1, आईआईएबी धान-2, आईआईएबी धान-3 और आईआईएबी धान-4 को भी एसवीआरसी द्वारा जारी करने की मंजूरी दी गई।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), हजारीबाग ने भी एक अरहर (वंशिका) एवं तीन मक्का किस्मों (भद्रिका मेज हाइब्रिड-1, भद्रिका मेज हाइब्रिड-2 और भद्रिका क्वालिटी मेज हाइब्रिड-1) के विमोचन प्रस्ताव प्रस्तुत किए थे, जिन्हें स्वीकृति मिल गई।

इसके अतिरिक्त, आईएआरआई हजारीबाग द्वारा झारखंड में क्षेत्र विस्तार के लिए अनुशंसित दो फसल किस्मों शालिमार मेज हाइब्रिड-5 (मक्का) एवं पूसा अवंतिका (मसूर) को भी एसवीआरसी ने मंजूरी प्रदान की।

बैठक में विभाग के विशेष सचिव गोपालजी तिवारी, बीएयू के अनुसंधान निदेशक डॉ पीके सिंह, आनुवंशिकी एवं पौधा प्रजनन विभाग की अध्यक्ष डॉ मनिगोपा चक्रबर्ती, भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएबी) के निदेशक डॉ सुजय रक्षित, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), हजारीबाग के प्रमुख डॉ विशाल नाथ, समेति‍ झारखंड के निदेशक विकास कुमार, विशेष आमंत्रित सदस्य डॉ ए वदूद, प्रगतिशील किसान नकुल महतो (पिठोरिया) एवं मीनू महतो (केरेडारी, हजारीबाग) एवं सम्बंधित वैज्ञानिक उपस्थित थे।

बीएयू विकसित किस्में के गुण

बिरसा मक्का हाइब्रिड-1

डॉ. मणिगोपा चक्रवर्ती द्वारा विकसित इस किस्म की उपज क्षमता 70-73 क्विंटल है। इसमें 10 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। यह खरीफ में 93 दिन तथा रबी में 127 दिन में पकती है। इसके अलावा यह 376 क्विंटल हरा चारा और 103 क्विंटल सूखा चारा उत्पादन देती है। यह तनाव सहनशील और उर्वरक के प्रति अधिक संवेदनशील किस्म है।

बिरसा कोंकन फलारू

डॉ. शुभ्रांशु सेनगुप्ता द्वारा विकसित झारखंड की पहली हवाई रतालू किस्म 150-165 दिनों में तैयार होती है। इसकी बुलबिल उपज क्षमता 10 टन प्रति हेक्टेयर है।

बिरसा सोयाबीन-5

डॉ. नूतन वर्मा द्वारा विकसित इस किस्म में 41.5 प्रतिशत प्रोटीन और 17 प्रतिशत तेल की मात्रा है। इसकी उपज क्षमता 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह 115-118 दिनों में तैयार होती है तथा मानक किस्म की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक उपज देती है।

बिरसा सोयाबीन-6

डॉ. नूतन वर्मा द्वारा विकसित इस किस्म की उपज क्षमता 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह 105-108 दिनों में तैयार होती है। इसमें 39 प्रतिशत प्रोटीन और 20 प्रतिशत तेल की मात्रा है।

बिरसा अरहर-3

डॉ. नीरज कुमार द्वारा विकसित यह मध्यम अवधि (178-180 दिन) की अरहर किस्म है। इसकी उपज क्षमता 21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है और यह मानक किस्म की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक उपज देती है।

बिरसा ओट-1

डॉ. योगेंद्र प्रसाद द्वारा विकसित यह चारा किस्म 420 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हरा चारा तथा लगभग 25.7 क्विंटल दाना उत्पादन देती है। बहु-कट प्रणाली के लिए उपयुक्त इस किस्म में 10.8 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन पाया जाता है।

बिरसा दीनानाथ-1

एकल कट प्रणाली के लिए उपयुक्त इस चारा किस्म की उपज क्षमता 468 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। डॉ. योगेंद्र प्रसाद द्वारा विकसित इस किस्म में 8.4 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन है।

बिरसा गेहूं-5

डॉ. सूर्य प्रकाश द्वारा विकसित इस गेहूं किस्म की उपज क्षमता 53 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह 106-109 दिनों में पकती है। इसमें आयरन (42.5 पीपीएम) और जिंक (39.6 पीपीएम) की मात्रा अधिक है।

बिरसा गेहूं-6

समय पर बुवाई और सिंचित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त इस किस्म की उपज क्षमता लगभग 69 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। डॉ. सूर्य प्रकाश द्वारा विकसित यह किस्म 120 दिनों में पकती है। इसमें 11.3 प्रतिशत प्रोटीन तथा आयरन (42.5 पीपीएम) और जिंक (39.8 पीपीएम) की उच्च मात्रा पाई जाती है।

बिरसा भारत सरसों-1

डॉ. अरुण कुमार द्वारा विकसित यह किस्म वर्षा आधारित मध्यम भूमि के लिए उपयुक्त है। इसमें 40.1 प्रतिशत तेल की मात्रा है और यह 108-111 दिनों में तैयार होती है। इसकी संभावित उपज 26.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

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