
रांची। झारखंड के लातेहार जिले की एक 33 वर्षीय आदिवासी महिला ने बरियातु पुलिस थाने के भीतर पुलिसकर्मियों द्वारा पीटे जाने, यौन उत्पीड़न और जातिसूचक गालियों का शिकार बनाए जाने का गंभीर आरोप लगाया है।
गुरुवार को एक आदिवासी अधिकार समूह ने सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़ा पीड़िता का एक वीडियो और उसकी शिकायत की कॉपी साझा की। इन आरोपों पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत शुक्रवार को अधिकारियों को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
प्रमुख आरोप और शिकायत के बिंदु
- घटना की तारीख: शिकायत के अनुसार, पीड़ित महिला (जो मेलम टोला की निवासी है) को 5 अगस्त को बजनीदिह महुआ के पास बकरियां चराते समय जबरन हिरासत में लिया गया था।
- बर्बरता: आरोप है कि पुलिस थाने के भीतर उसे गंभीर रूप से प्रताड़ित किया गया, उल्टा लटकाया गया और उसके मुंह में हरी मिर्च जबरन ठूसी गई।
- फर्जी वीडियो और उगाही: महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने जबरन एक झूठा वीडियो बयान रिकॉर्ड किया, जिसमें उसे अवैध पोस्ता (अफीम) की खेती में शामिल होने का दावा करने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद अगली रात उसे छोड़ा गया। साथ ही, पुलिसकर्मियों पर उसके घर में तोड़फोड़ करने और आगामी शादी के लिए बचाए गए 80,000 रुपये चुराने का भी आरोप है।
प्रशासन और संगठनों की प्रतिक्रिया
झारखंड जनाधिकार महासभा और अन्य मानवाधिकार संगठनों के हस्तक्षेप और मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद, झारखंड पुलिस ने इस घटना की जांच के लिए एक आंतरिक जांच टीम का गठन किया है। स्थानीय निवासी और मानवाधिकार समूह आरोपी पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को तुरंत निलंबित करने और गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं।
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