
लखनऊ। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले आगामी चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर चुनावी और संगठनात्मक सुगबुगाहट तेज़ हो गई है। विधानसभा में अपने बहुमत के बल पर पार्टी के खाते में 8 सीटें जाने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, चुनाव की तिथियों से पहले ही उम्मीदवारों के नामों को लेकर शीर्ष नेतृत्व और राज्य संगठन में गंभीर विचार-विमर्श शुरू हो चुका है।
इनका कार्यकाल हो रहा खत्म
उत्तर प्रदेश से बीजेपी के 7 राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, पूर्व राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह, पूर्व डीजीपी बृजलाल, नीरज शेखर, गीता शाक्य और सीमा द्विवेदी शामिल हैं। इसके अलावा, पूर्व उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार का उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद एक सीट पहले से रिक्त चल रही है।
इन दिग्गजों की है दावेदारी
बीएल वर्मा : लोध (OBC) समुदाय का प्रमुख चेहरा और केंद्रीय मंत्री होने के साथ-साथ पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के करीब माने जाते हैं। उनके नाम पर दोबारा मुहर लगने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
हरदीप सिंह पुरी : 74 वर्षीय केंद्रीय मंत्री के अनुभव और सिख समुदाय तक पार्टी की पहुंच को देखते हुए उनके नाम पर विचार जारी है। हालांकि, उनकी बढ़ती उम्र निर्णय प्रक्रिया में एक कारक बन सकती है।
बृजलाल : यूपी के पूर्व डीजीपी और दलित समाज से आने वाले वरिष्ठ नेता पार्टी का पक्ष मुखरता से रखने के लिए जाने जाते हैं।
नीरज शेखर व अरुण सिंह : पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के रिश्तेदार व संगठन में लंबा अनुभव रखने वाले अरुण सिंह की पुनरावृत्ति पर भी मंथन जारी है।
इन चेहरों की सुगबुगाहट
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी 8 में से 4 से 5 सीटों पर नए चेहरों को मौका दे सकती है।
स्मृति ईरानी : हाल ही में बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त की गईं स्मृति ईरानी का नाम राज्यसभा उम्मीदवार की दौड़ में सबसे प्रमुखता से सामने आ रहा है।
हरीश द्विवेदी : ब्राह्मण समाज के प्रमुख चेहरे और सांगठनिक दायित्व संभाल रहे हरीश द्विवेदी को भी उच्च सदन में भेजे जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं।
विधानसभा चुनाव के समीकरण : पूर्व विधायक सीमा द्विवेदी (ब्राह्मण) और बीजेपी महिला/OBC मोर्चे से जुड़ीं गीता शाक्य के संदर्भ में यह भी विचार किया जा रहा है कि क्या उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजा जाए या आगामी राज्य विधानसभा चुनावों में चुनावी मैदान में उतारा जाए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी इस बार क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधते हुए युवाओं और अनुभवी नेताओं के सामंजस्य पर बल देगी। हालांकि, अंतिम सूची केंद्रीय चुनाव समिति की मुहर के बाद ही जारी की जाएगी।
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