नई दिल्ली। बड़ी खबर आई है, सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण और आरक्षण से जुड़े एक अहम मामले में मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को रद्द करने के फैसले को सही ठहराया है, जिसमें हिंदू धर्म से इस्लाम अपनाने वालों को ‘पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम)’ के तहत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया था।
जानें मुख्य बातें
- मामला: यह कानूनी विवाद तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले के एक व्यक्ति से जुड़ा है, जिसने 2016 में धर्म बदलकर इस्लाम अपनाने के बाद ‘मुस्लिम लेब्बई’ समुदाय के रूप में कम्युनिटी सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया था, जिसे स्थानीय तहसीलदार ने ठुकरा दिया था।
- अदालती रुख: सुप्रीम कोर्ट और मद्रास हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपना लेने भर से किसी व्यक्ति को अपने आप ‘पिछड़ा वर्ग मुस्लिम’ का आरक्षण या दर्जा नहीं मिल जाता।
- फैसला: अदालत ने तमिलनाडु सरकार के 2024 के उस आदेश को असंवैधानिक करार दिया है, जिसके तहत कुछ खास पिछड़े वर्गों से इस्लाम में धर्मांतरण करने वालों को मुस्लिम कोटे के तहत आरक्षण का लाभ देने की व्यवस्था की गई थी।
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