नई दिल्ली। कॉकट्रेच पीपल्स पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने हाल ही में आंदोलन को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। विजय दशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर जारी लगभग 16 मिनट के एक वीडियो संदेश में दिपके ने खुलासा किया। कहा कि आंदोलन से जुड़े तमाम बड़े फैसले मुख्य रूप से सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास लेते थे। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों नेता दिल्ली में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं।
वीडियो संदेश में अभिजीत दिपके ने आंदोलन को आगे बढ़ाने में आशुतोष रांका और सौरव दास की भूमिका की जमकर सराहना की। उन्होंने अपने सहयोगियों को ‘भाई और परिवार’ की तरह बताते हुए कहा कि भले ही बाहर से ऐसा प्रतीत होता हो कि वह अकेले आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में अगले दिन की रणनीतियों और महत्वपूर्ण कदमों का निर्धारण आशुतोष और सौरव ही तय करते थे। वह खुद उनके निर्देशों का पालन करते थे।
दिवाली के त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए, दिपके ने CJP समर्थकों और कार्यकर्ताओं से दीवाली तक किसी भी तरह के नए विरोध प्रदर्शनों से दूर रहने का आग्रह किया है। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में आंदोलन से जुड़े लोगों और उनके परिवारों द्वारा झेली गई कठिनाइयों को स्वीकार किया। कार्यकर्ताओं को इस त्योहारी अवधि के दौरान अपने परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने की सलाह दी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की ओर से दिवाली के बाद तक कोई नया प्रदर्शन करने की योजना नहीं है, ताकि समर्थकों को अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने का अवसर मिल सके। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि इसे आंदोलन की स्थायी समाप्ति नहीं समझा जाना चाहिए।
यह पूरा घटनाक्रम दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 13 अक्टूबर को हुई घटनाओं के बाद विरोध स्थल पर प्रवेश और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने से संबंधित मामलों में आशुतोष रांका और सौरव दास को हिरासत में ले लिया गया था। दोनों नेताओं की हिरासत और चल रही कानूनी कार्यवाही के बीच ही अभिजीत दिपके ने सामने आकर आंदोलन में उनके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया है।
अपने संदेश में दिपके ने आंदोलन को ‘नफरत के खिलाफ लड़ाई’ करार दिया। उन्होंने शांति, करुणा और अहिंसा के महत्व पर जोर देते हुए समर्थकों से अपील की कि वे प्रदर्शन के दौरान ऐसे किसी भी आचरण से बचें जो आंदोलन के मूल उद्देश्यों के विपरीत हो। महात्मा गांधी के सत्याग्रह और अहिंसक प्रतिरोध के सिद्धांतों का हवाला देते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं से संयम और धैर्य बनाए रखने की बात कही।
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