मेलों से नहीं, दृष्टिकोण में परिवर्तन से होगा बचपन संरक्षित
प्रियंक कानूनगो बाल अधिकार एक ऐसा विषय है, जिसे वैश्विक स्तर पर जितनी अहमियत दी गई है। उसकी तुलना में हमारे देश में आजादी के बाद 6-7 दशक तक यह अनदेखा रहा। इसी अनदेखी के चलते समय की मांग के अनुसार ना तो कोई नई दृष्टि विकसित हो पाई है और ना ही हम अपनी […]
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