- 517 बकरियों का हुआ टीकाकरण
रांची। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के अंतर्गत संचालित अखिल भारतीय समन्वित बकरी अनुसंधान परियोजना के तत्वावधान में पूर्वी सिंहभूम जिले के बाराबंकी गांव में राष्ट्रीय बकरी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक बकरी पालन को बढ़ावा देना, टीकाकरण के महत्व के प्रति किसानों को जागरूक करना और बकरी पालन के माध्यम से किसानों की आय और आजीविका को सुदृढ़ बनाना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ आलोक कुमार पांडेय ने कहा कि बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों, विशेष रूप से समय पर टीकाकरण और रोग नियंत्रण उपायों को अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे बकरी पालन अधिक लाभकारी, टिकाऊ और सुरक्षित व्यवसाय बन सकता है।
डॉ आलोक ने बताया कि झारखंड में लगभग 91.2 लाख बकरियां हैं, जो देश की कुल बकरी आबादी का 6.1 प्रतिशत है। हाल के वर्षों में राज्य में बकरी संख्या में 38.6 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाती है।
परियोजना की प्रधान अन्वेषक डॉ नंदनी कुमारी ने किसानों को वैज्ञानिक बकरी पालन, संतुलित पोषण, प्रजनन प्रबंधन तथा स्वास्थ्य देखभाल की जानकारी दी। उन्होंने झारखंड की प्रसिद्ध ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियों के आर्थिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए परियोजना के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही किसानों से विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित वैज्ञानिक बकरी पालन एवं एकीकृत कृषि प्रणाली संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
सह-प्रधान अन्वेषक डॉ शैलेन्द्र कुमार रजक ने किसानों को बकरियों में होने वाली प्रमुख संक्रामक बीमारियों, उनके लक्षण, रोकथाम एवं समय पर टीकाकरण के महत्व की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नियमित स्वास्थ्य प्रबंधन अपनाकर पशुहानि को काफी हद तक रोका जा सकता है।
इस अवसर पर ब्लैक बंगाल बकरी पालन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसान जबरानी महतो, सुरमिला सिंह और बिनोद सिंह को सम्मानित किया गया। सम्मानित किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने बहुत कम संख्या में बकरियों से शुरुआत की थी। एआईसीआरपी टीम के निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन, समय पर टीकाकरण, कृमिनाशक दवाओं, डिपिंग, निःशुल्क उपचार एवं दूरभाष के माध्यम से पशु चिकित्सा परामर्श की बदौलत आज उनके पास लगभग 30 बकरियों का सफल झुंड है।
कार्यक्रम में आईएफएसआर एवं आईबीएफ के अंतर्गत कार्यरत 12 इंटर्नशिप विद्यार्थियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। किसानों के बीच ग्रोथ प्रमोटर, मिनरल मिक्सचर, कृमिनाशक दवाएं, विटामिन सप्लीमेंट, लीवर एक्सट्रैक्ट, हर्बल आंत स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद, एंटीबायोटिक्स सहित विभिन्न आवश्यक पशु स्वास्थ्य उत्पाद निःशुल्क वितरित किए।
कार्यक्रम के दौरान 517 बकरियों का एंटरोटॉक्सीमिया रोग के विरुद्ध टीकाकरण किया गया, जबकि 49 किसानों को निःशुल्क पशु चिकित्सा दवाओं का वितरण कर लाभान्वित किया गया। कार्यक्रम में भ्रमण दल के सदस्य डॉ पंकज कुमार एवं डॉ मधुरेंद्र बचन भी उपस्थित रहे।
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