NDA में शामिल हुए पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान को ये तोहफा देने की तैयारी में गुजरात सरकार

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वडोदरा (गुजरात)। टीएमसी (TMC) का साथ छोड़कर NDA खेमे में शामिल होने वाले पूर्व भारतीय क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान को गुजरात सरकार की ओर से बड़ा तोहफा मिलने जा रहा है। इसे लेकर तैयारी की जा रही है। इसपर 23 अक्‍टूबर को अंतिम मुहर लगने की संभावना है।

वडोदरा नगर निगम (VMC) ने वडोदरा में एक विवादित नगरपालिका भूखंड (म्युनिसिपल प्लॉट) यूसुफ पठान को आवंटित करने का प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव के तहत जमीन का एक बड़ा हिस्सा उन्हें ‘उपहार’ (गिफ्ट) में दिया जाएगा, जबकि बाकी हिस्से पर भारी छूट दी जाएगी।

क्या है पूरा प्रस्ताव

सोमवार को जारी एजेंडे के अनुसार, निगम कमिश्नर द्वारा प्रस्तुत किया गया यह प्रस्ताव 23 अक्टूबर को बीजेपी शासित नागरिक निकाय की स्थायी समिति (स्टैंडिंग कमेटी) के सामने अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

जमीन का विवरण

यह विवादित भूखंड 978 वर्ग मीटर का आवासीय प्लॉट है, जो वडोदरा के तांडेलजा इलाके में यूसुफ पठान के पैतृक घर के ठीक बगल में स्थित है। यूसुफ पठान साल 2012 से ही इस जमीन को हासिल करने की कोशिश कर रहे थे।

गिफ्ट और डिस्काउंट

नए प्रस्ताव के मुताबिक, वीएमसी के स्वामित्व वाले इस प्लॉट का 500 वर्ग मीटर हिस्सा यूसुफ पठान को ‘मुफ्त उपहार’ के रूप में दिया जाएगा। वहीं, बाकी बचे 478 वर्ग मीटर हिस्से पर 45 प्रतिशत की भारी छूट दी जाएगी। यानी उन्हें वडोदरा शहरी विकास प्राधिकरण मूल्यांकन समिति द्वारा तय की गई दर का केवल 55 प्रतिशत हिस्सा ही चुकाना होगा।

यह आवंटन गुजरात सरकार के शहरी विकास और शहरी आवास विभाग द्वारा साल 2024 में जारी एक प्रस्ताव के तहत ‘विशेष नियमों और शर्तों’ के अधीन किया जाएगा।

क्या है जमीन का विवाद

यूसुफ पठान ने सबसे पहले 2012 में अपने घर के पास के इस प्लॉट को खरीदने का अनुरोध किया था। हालांकि, वीएमसी ने शुरुआत में इस पर सहमति जताई थी, लेकिन साल 2014 में गुजरात सरकार ने इस बिक्री को खारिज कर दिया था।

फिर गरमाया मामला

साल 2024 में पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट से टीएमसी के टिकट पर सांसद चुने जाने के बाद यह विवाद फिर से सतह पर आया। वडोदरा नगर निगम ने उन्हें नोटिस जारी कर म्युनिसिपल जमीन पर कथित अतिक्रमण को हटाने और खाली करने के लिए कहा था।

हाई कोर्ट में कानूनी लड़ाई

पठान ने इस नोटिस को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने तर्क दिया था कि मामला एक दशक से अधिक पुराना है और निगम को अतिक्रमण हटाने का निर्देश देने से पहले कारण बताओ नोटिस जारी करना चाहिए था। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि जमीन राज्य सरकार की नहीं बल्कि नगर निगम की है।

अदालत से वापसी

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें उनके भूखंड के अनुरोध को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद पठान ने इस आदेश को खंडपीठ (डिवीजन बेंच) में चुनौती दी। हालांकि, इस साल अगस्त में उनके वकील द्वारा यह कहे जाने के बाद कि वे राज्य सरकार की नीति के तहत मामले को आगे बढ़ा रहे हैं, अपील वापस ले ली गई थी।

खत्‍म होगा विवाद

यदि 23 अक्टूबर को होने वाली बैठक में स्थायी समिति इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे देती है, तो पिछले 12 सालों से चला आ रहा यह विवाद पूरी तरह खत्म हो जाएगा। यह जमीन आधिकारिक रूप से यूसुफ पठान के नाम हो जाएगी।

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