
शिव कुमार सिंह
रांची। 15 नवंबर 2000 को अस्तित्व में आए झारखंड में विधानसभा की राजनीति के साथ एक और दिलचस्प पहलू जुड़ा है। राज्य गठन के बाद से अब तक कई ऐसे विधायक रहे हैं, जिनके नाम के आगे ‘डॉ.’ लिखने का गौरव हासिल है।
इनमें कुछ पेशे से चिकित्सक रहे हैं, जबकि कई ने उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में पीएचडी की उपाधि हासिल कर अपने नाम के साथ डॉक्टर शब्द जोड़ा है। इस कड़ी में अब डुमरी के जेएलकेएम विधायक जयराम महतो का नाम भी जुड़ गया है।
धनबाद स्थित बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को राज्यपाल सह विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने जयराम महतो को पीएचडी की उपाधि प्रदान की। अंग्रेजी विभाग से शोध पूरा करने के बाद अब उनके नाम के आगे भी डॉक्टर की उपाधि जुड़ गई है। राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हुए शोध कार्य पूरा करना उनके शैक्षणिक सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
चिकित्सक से लेकर शोधकर्ता तक, अलग-अलग पृष्ठभूमि
झारखंड की राजनीति में डॉक्टर उपाधि वाले नेताओं की चर्चा केवल चिकित्सा पेशे तक सीमित नहीं है। डॉ. इरफान अंसारी चिकित्सा शिक्षा प्राप्त चिकित्सक हैं और जामताड़ा से विधायक होने के साथ राज्य सरकार में मंत्री भी हैं।
वहीं, डॉ. दिनेश कुमार सारंगी बहरागोड़ा से विधायक रह चुके हैं और झारखंड के प्रथम स्वास्थ्य मंत्री के रूप में भी उनकी पहचान रही है।
एकीकृत बिहार के समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे डॉ. सबा अहमद भी झारखंड विधानसभा के शुरुआती दौर के उन नेताओं में शामिल रहे, जिनकी पहचान चिकित्सक के रूप में थी।
इन नेताओं की पृष्ठभूमि बताती है कि राजनीति में डॉक्टर की उपाधि का संबंध केवल अकादमिक उपलब्धि से नहीं, बल्कि चिकित्सा पेशे से भी रहा है। हालांकि, किसी नेता के नाम के आगे डॉक्टर लिखे जाने और उसकी शैक्षणिक योग्यता के बीच अंतर समझना जरूरी है।
पीएचडी की उपाधि से भी जुड़ा है ‘डॉ.’ का सम्मान
उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करने वाले कई नेताओं के नाम भी इस सूची में शामिल हैं। डॉ. रामेश्वर उरांव अर्थशास्त्र में पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने के साथ पूर्व आईपीएस अधिकारी भी रहे हैं। उन्होंने लोहरदगा का प्रतिनिधित्व किया है और केंद्र तथा राज्य सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
डॉ. नीरा यादव कोडरमा से विधायक रही हैं और झारखंड सरकार में शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। डॉ. लुईस मरांडी का नाम भी राज्य की राजनीति में प्रमुख रहा है। उन्होंने दुमका और जामा विधानसभा क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व किया है तथा राज्य सरकार में मंत्री के रूप में कार्य किया है। इसी क्रम में डॉ. लंबोदर महतो, डॉ. सरफराज अहमद, डॉ. कुशवाहा शशिभूषण मेहता और डॉ. जीतू चरण राम जैसे नाम भी चर्चा में आते हैं।
इन नेताओं की शैक्षणिक योग्यताओं और राजनीतिक कार्यकाल में अंतर है, लेकिन इनके नामों के साथ डॉक्टर उपाधि का उल्लेख राज्य की राजनीति में शिक्षा और पेशेवर पृष्ठभूमि की विविधता को सामने लाता है।
जयराम महतो के लिए राजनीति के साथ शिक्षा का नया पड़ाव
डुमरी के विधायक जयराम महतो का अंग्रेजी विषय में शोध पूरा कर पीएचडी हासिल करना इसलिए भी उल्लेखनीय है कि वह सक्रिय राजनीति के बीच अपनी शैक्षणिक यात्रा को आगे बढ़ाते रहे। हाल ही में थीसिस का अंतिम वाइवा पूरा करने के बाद विश्वविद्यालय की प्रक्रिया संपन्न हुई और उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। उनकी उपलब्धि के साथ झारखंड की राजनीति में उन नेताओं की सूची में एक नया नाम जुड़ा है, जिनकी पहचान जनप्रतिनिधि होने के साथ शैक्षणिक उपलब्धियों से भी बनती है। हालांकि, पीएचडी हासिल करने वाले नेता और चिकित्सा की डिग्री के आधार पर डॉक्टर कहलाने वाले नेता अलग-अलग शैक्षणिक श्रेणियों में आते हैं।
राजनीति और शिक्षा का संगम
झारखंड विधानसभा के इतिहास में डॉक्टर उपाधि वाले नेताओं की मौजूदगी राज्य की राजनीति की विविध पृष्ठभूमि को दर्शाती है। किसी ने चिकित्सा पेशे से सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया, तो किसी ने प्रशासनिक सेवा, उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र से अपनी पहचान बनाई। जयराम महतो की नई उपलब्धि इसी परंपरा की अगली कड़ी है।
राजनीति में सक्रिय रहते हुए उच्च शिक्षा हासिल करने वाले जनप्रतिनिधियों की उपलब्धियां यह संदेश भी देती हैं कि सार्वजनिक जीवन और अकादमिक अध्ययन साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।झारखंड में डॉक्टर उपाधि वाले नेताओं की यह फेहरिस्त आने वाले समय में और बढ़ सकती है।
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