
साइबेरिया में ट्रेन चल सकती है तो उत्तर भारत में क्यों नहीं
जमशेदपुर। क़ौमी सिख मोर्चा अध्यक्ष अधिवक्ता कुलबिंदर सिंह ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि जमशेदपुर के सांसद और भारतीय जनता पार्टी नेता विद्युत वरण महतो का प्रयास सफल हो और साल 2026-27 में रेलवे बोर्ड की जलियांवाला बाग ट्रेन को कोहरे के मद्देनजर प्रस्तावित बंदी वापस हो जाए।
कुलविंदर सिंह के अनुसार पिछले कई सालों से उत्तर बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब जाने की चाह रखने वाले यात्री दिसंबर से फरवरी तक निराशा झेलने को मजबूर हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल से ऐसा होता आ रहा है और उनके प्रयास भी असफल रहे। सांसद विद्युत वरण महतो भी रेल मंत्री एवं रेलवे बोर्ड को समझने समझाने में लगातार विफल रहे हैं।
जलियांवाला बाग एक्सप्रेस सांस्कृतिक धार्मिक एकता की प्रतिरूप है। गया जी, बनारस, अयोध्या, बरेली, हरिद्वार और अमृतसर के हिंदू, मुस्लिम और सिक्खों के ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली ट्रेन है।
पिछले 12 साल से देश में नरेंद्र मोदी की सरकार है और लगातार दावे किए जा रहे हैं कि विज्ञान के क्षेत्र में हम किसी से कम नहीं है। जमाना सैटेलाइट और जीपीएस कंट्रोल सिस्टम का है। ऐसे में सवाल उठता है कि रेल मंत्री रील बनाकर केवल बोगस जानकारी दे रहे हैं और जनता को भ्रम और भुलावे में रखते हैं।
जब रूस के साइबेरिया में माइनस 25 से माइनस 62 डिग्री तक घने अंधकार कोहरे में ट्रांस साइबेरियन ट्रेन चलती है तो भारत में एक अथवा दो डिग्री तापमान पर बंद क्यों हो जाती है? तकनीकी टीम वहां भेज कर क्यों नहीं भारत में इसे लागू करते।
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