सम्राट चौधरी और हेमंत सोरेन के बीच विवाद सुलझा, अमित शाह ने दिल्ली में कराया समझौता

झारखंड
Spread the love

रांची। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के बीच विवाद सुलझ गया है। सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर बिहार और झारखंड के बीच सहमति बन गई है।

समझौते के अनुसार 7.75 मिलियन एकड़ फीट पानी में से बिहार को 5.57 एमएएफ और 2 एमएएफ पानी झारखंड को मिलेगा।

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे पर सहमति बन गई है।

बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रहे। इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच आज के समझौते से पूर्वी भारत के बहुप्रतीक्षित जलविवाद का समाधान हुआ है।

उन्होंने कहा कि इस समझौते से बिहार और झारखंड के बहुत बड़े ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों किसानों को सिंचाई के लिए जल मिलने के साथ ही लोगों को पीने का पानी उपलब्ध होगा।

अमित शाह ने कहा कि सोन नदी के बंटवारे के संबंध में आज हुआ समझौता प्रधानमंत्री मोदी की ओर से की गई टीम भारत की परिकल्पना और सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों का अलग-अलग अस्तित्व तो है ही, मगर भारत के परिप्रेक्ष्य में सभी राज्य टीम इंडिया बनकर आगे बढ़ें, तो कोई समस्या ऐसी नहीं है जिसका निराकरण न हो सके।

शाह कहा कि इस वर्ष अभी तक विभिन्न राज्यों के बीच यह चौथा जल समझौता है, जिससे सिंचाई, ग्रामीण विकास और पेयजल के लिए जल उपलब्धता में वृद्धि होगी।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बिहार और झारखंड के बीच लगभग 25 साल पुराने जल विवाद के हल के लिए आज हुआ यह समझौता इस बात का उदाहरण है कि सहकारी संघवाद की भावना के साथ संवाद हो तो हर समस्या का समाधान संभव है।

दोनों राज्यों के एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र, किसानों, ग्रामीण क्षेत्र और पीने के जल की समस्या का हमेशा के लिए आज निराकरण हो गया है।

अमित शाह ने कहा कि इस समझौते से बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना की बड़ी आबादी के लिए पीने के पानी और सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो जाएगा।

इसके साथ ही, झारखंड के पलामू, गढ़वा और अन्य क्षेत्रों में सिंचाई और पीने के पानी के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोन नदी जल बंटवारे के समाधान के लिए प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया।

गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर अंतर्राज्यीय परिषद के माध्यम से विभिन्न राज्यों के बीच कई दशकों से लंबित जल विवादों का समाधान निकाला जा रहा है, इस वर्ष अब तक चार ऐतिहासिक समझौते हो चुके हैं।

दरअसल, सोन नदी के जल बंटवारे की कहानी 1973 से शुरू होती है। तब बाणसागर परियोजना के तहत मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अविभाजित बिहार के बीच समझौता हुआ था।

इस समझौते के तहत संयुक्त बिहार को कुल 7.75 मिलियन एकड़ फीट पानी आवंटित किया गया था। तब झारखंड बिहार का ही हिस्सा था, इसलिए पूरा हिस्सा बिहार के नाम पर था।

लेकिन, बिहार के झारखंड से अलग होते ही इसको लेकर विवाद शुरू हो गया जो करीब ढाई दशक तक बदस्तूर चलता रहा।

साल 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड नया राज्य बना तो इसके बाद झारखंड ने सोन नदी के पानी में अपनी हिस्सेदारी की मांग शुरू कर दी।

झारखंड का तर्क था कि सोन नदी का उद्गम और बड़ा कैचमेंट उसके क्षेत्र में आता है, इसलिए उसे भी हिस्सा मिलना चाहिए। वहीं बिहार 1973 के समझौते का हवाला देकर पूरा 7.75 एमएएफ पानी अपने पास रखना चाहता था।

इसी वजह से बिहार की महत्वाकांक्षी इंद्रपुरी जलाशय परियोजना पर झारखंड एनओसी नहीं दे रहा था और परियोजना 53 साल से लटकी हुई थी।

खबरें और भी हैं। इसे आप अपने न्‍यूज वेब पोर्टल dainikbharat24.com पर सीधे भी जाकर पढ़ सकते हैं। नोटिफिकेशन को अलाउ कर खबरों से अपडेट रह सकते हैं। साथ ही, सुविधा के मुताबिक अन्‍य खबरें भी पढ़ सकते हैं।

आप अपने न्‍यूज वेब पोर्टल से फेसबुक, इंस्‍टाग्राम, X, स्‍वदेशी एप arattai सहित अन्‍य सोशल मीडिया पर भी जुड़ सकते हैं। खबरें पढ़ सकते हैं। सीधे गूगल हिन्‍दी न्‍यूज पर जाकर खबरें पढ़ सकते हैं। अपने सुझाव या खबरें हमें dainikbharat24@gmail.com पर भेजें।

व्‍हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें
https://chat.whatsapp.com/H5n5EBsvk6S4fpctWHfcLK

स्‍वदेशी एप पर इससे जुड़ें
https://chat.arattai.in/groups/t43545f313238383036363337343930333731343936395f32303030323937303330392d47437c3031303131353032363138323137353934323036313934393230

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *