

पटना। आरजेडी एक बड़े विभाजन की ओर बढ़ रहा है। इसके तहत इसके 25 में से 15 से 16 विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं। आरजेडी के भीतर नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई विधायक पार्टी के नेतृत्व और कार्यप्रणाली से असंतुष्ट हैं।
हाल ही में आरजेडी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए मृत्यंजय तिवारी ने बुधवार को यह दावा किया। उन्होंने कहा कि आरजेडी अब एक ऐसी पार्टी बनकर रह गई है, जिसके पास “न तो नीति है, न नेतृत्व और न ही कोई प्रभावी संगठन”।

दावे के मुख्य बिंदु
श्री तिवारी का यह बयान भाजपा नेताओं के उन लगातार दावों के बीच आया है, जिसमें कहा गया है कि विपक्ष के विधायक सत्ताधारी गठबंधन के संपर्क में हैं। दिसंबर, 2025 में भाजपा नेता राम कृपाल यादव ने भी दावा किया था कि आरजेडी के सभी 25 विधायक भाजपा के संपर्क में हैं।
आरजेडी के एक प्रमुख प्रवक्ता रहे श्री तिवारी ने पिछले महीने पार्टी नेतृत्व पर उनकी शिकायतों को नजरअंदाज करने और सुधारात्मक कार्रवाई करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गए और लगातार अपनी पूर्व पार्टी पर तीखे हमले कर रहे हैं।

श्री तिवारी ने आरोप लगाया कि आरजेडी में अब ऐसा नेतृत्व नहीं बचा है, जो अपने कार्यकर्ताओं और विधायकों का विश्वास बनाए रख सके। उन्होंने सवाल किया कि यदि कार्यकर्ताओं और विधायकों की चिंताओं को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा, तो वे पार्टी के साथ क्यों रहेंगे? उन्होंने कहा, “आरजेडी में कार्यकर्ता की कोई पूछ नहीं है।”
श्री तिवारी ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम द्वारा पैदा की गई चुनौती का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो विधानसभा चुनावों में एआईएमआईएम ने आरजेडी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाई है। वर्तमान में बिहार विधानसभा में आरजेडी के 25 विधायक हैं, जबकि एआईएमआईएम के 5 विधायक हैं।
श्री तिवारी ने कहा कि विपक्षी वोटों का विभाजन आरजेडी की चुनावी संभावनाओं को और अधिक जटिल बना सकता है। इसके अलावा, बांकीपुर में हाल ही में हुए उपचुनाव में मुसलमानों द्वारा जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार प्रशांत किशोर के पक्ष में मतदान करना भी आरजेडी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
वरिष्ठ नेताओं में जुबानी जंग
मृत्यंजय तिवारी का यह बयान ऐसे समय आया है जब आरजेडी के दो वरिष्ठ नेता भाई वीरेंद्र और शक्ति सिंह यादव पार्टी के खराब चुनावी प्रदर्शन के लिए एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए आपसी जुबानी जंग में उलझे हुए हैं।
भाई वीरेंद्र मनेर से विधायक हैं, जबकि शक्ति सिंह यादव आरजेडी के प्रवक्ता हैं।
भाई वीरेंद्र ने शक्ति सिंह यादव पर कुछ नेताओं के एक खास समूह के साथ “पार्टी को हाईजैक करने का प्रयास करने” का आरोप लगाया है।
वहीं, शक्ति सिंह यादव का कहना है कि आरजेडी के चुनाव चिन्ह पर कई बार चुनाव जीतने के बावजूद पार्टी में भाई वीरेंद्र का योगदान शून्य है।
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