
नई दिल्ली। अदालत ने भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों के बहुचर्चित यौन उत्पीड़न मामले में बरी कर दिया है। मुकदमा शुरू होने के दो साल बाद राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने सह-आरोपी और महासंघ के पूर्व सचिव विनोद तोमर समेत दोनों को बरी करने का यह फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में 2 जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
किन धाराओं में मामला दर्ज
बृजभूषण शरण सिंह पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल), 354ए (यौन उत्पीड़न) और 506 (1) (अपराधियों को डराना-धमकाना) के तहत आरोप तय किए गए थे। वहीं, सह-आरोपी विनोद तोमर पर आपराधिक धमकी देने के आरोप लगाए गए थे। इन मामलों में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 5 साल तक की सजा का प्रावधान था।
जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन
यह मामला जनवरी, 2023 में तब प्रकाश में आया, जब देश की कई दिग्गज महिला पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक धरना-प्रदर्शन किया। इन पहलवानों ने बृजभूषण सिंह पर कई वर्षों तक महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया था। उनकी गिरफ्तारी व महासंघ से निष्कासन की मांग की थी।
विवाद बढ़ने के बाद, उत्तर प्रदेश के कैसरगंज से तत्कालीन बीजेपी सांसद बृजभूषण सिंह को महासंघ के प्रमुख पद से हटा दिया गया था। उनके करीबी विनोद भी निलंबित कर दिए गए थे।
दो एफआईआर दर्ज हुई
केंद्रीय खेल मंत्रालय द्वारा जांच समिति के गठन के आश्वासन के बाद पहलवानों ने प्रदर्शन अस्थायी रूप से रोक दिया था। हालांकि, कोई ठोस कार्रवाई न होने पर अप्रैल 2023 में उन्होंने दोबारा धरना शुरू कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद 28 अप्रैल 2023 को दिल्ली पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज कीं। पहली एफआईआर छह वयस्क महिला पहलवानों की शिकायत पर सिंह और तोमर के खिलाफ थी।
दूसरी एफआईआर एक नाबालिग पहलवान द्वारा लगाए गए आरोपों पर पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज की गई थी। हालांकि, मई पिछले साल दिल्ली कोर्ट ने नाबालिग पीड़िता (जो अब बालिग हो चुकी है) द्वारा अपने आरोप वापस लेने के बाद इस पॉक्सो मामले को बंद कर दिया था।
मुकदमा और कोर्ट की कार्यवाही
जून, 2023 में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करते हुए मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत होने का दावा किया था। इसके बाद मई, 2024 में अदालत ने आरोप तय किए, जहां दोनों आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया और ट्रायल की मांग की।
जुलाई 2024 से इन-कैमरा (बंद कमरे में) चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 6 पीड़ित महिलाओं समेत महासंघ और भारतीय खेल प्राधिकरण के अधिकारियों सहित कुल 32 गवाहों से पूछताछ की गई।
अभियोजन पक्ष के वकील मनीष रावत ने दलील दी थी कि सभी गवाहों ने पीड़ितों के बयानों का समर्थन किया है। पीड़ितों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन पेश हुईं। वहीं, बृजभूषण सिंह के वकील राजीव मोहन ने सभी आरोपों को “प्रेरित” और उन्हें डब्ल्यूएफआई के पद से हटाने की “साजिश” करार दिया था।
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