- फसल नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
रांची। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) ने अनुसंधान, नवाचार और आधुनिक फसल सुधार के क्षेत्र में शोध एवं प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अत्याधुनिक प्लांट ब्रीडिंग मॉलेक्यूलर प्रयोगशाला की स्थापना की है। यह नई प्रयोगशाला कृषि, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने की दिशा में विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी।

डीएनए निष्कर्षण, मार्कर-असिस्टेड चयन, जीनोटाइपिंग और मॉलेक्यूलर डायग्नोस्टिक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से सुसज्जित यह प्रयोगशाला शोधकर्ताओं तथा स्नातकोत्तर (पीजी) छात्रों को अधिक उपज देने वाली, बेहतर पोषण गुणवत्ता वाली और कीट, रोग एवं प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रति अधिक सहनशील फसल किस्मों के विकास में सहयोग प्रदान करेगी।
बीएयू के कुलपति डॉ एससी दुबे ने गुरुवार को इस प्रयोगशाला का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “यह सुविधा हमारे संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पारंपरिक पादप प्रजनन को मॉलेक्यूलर विज्ञान के साथ जोड़कर हम नवाचार के नए अवसर सृजित कर रहे हैं, जिससे किसानों, उद्योग जगत और समाज को लाभ मिलेगा।”
कुलपति ने यह भी कहा कि शिक्षकों को नई चीजें सीखने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए तथा गैर-आनुवंशिकी से जुड़े शिक्षकों को भी मॉलेक्यूलर अनुसंधान का अनुभव प्राप्त करना चाहिए, क्योंकि शिक्षक और वैज्ञानिक आजीवन सीखने वाले होते हैं।
प्लांट ब्रीडिंग मॉलेक्यूलर प्रयोगशाला अब पूरी तरह संचालित हो चुकी है। इसमें पीजी एवं पीएचडी छात्रों के शोध कार्य शुरू हो गए हैं। यह प्रयोगशाला क्षेत्रीय केंद्र के रूप में कार्य करेगी।
सरकारी एजेंसियों, कृषि अनुसंधान संस्थानों और निजी क्षेत्र के संगठनों के साथ सहयोग को बढ़ावा देकर जलवायु-अनुकूल फसल प्रौद्योगिकियों के विकास और उनके प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह प्रयोगशाला आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग की अध्यक्ष डॉ मणिगोपा चक्रवर्ती के मार्गदर्शन में संचालित होगी।
प्रयोगशाला में मॉलेक्यूलर अनुसंधान के लिए आवश्यक सभी अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं। इन उपकरणों की सहायता से रोग एवं कीट प्रतिरोध, सूखा सहनशीलता, अधिक उत्पादन क्षमता, बेहतर गुणवत्ता तथा उन्नत पोषण मूल्य जैसे वांछनीय गुणों वाली फसल किस्मों के विकास की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
लाभकारी जीनों की प्रारंभिक पहचान और पादप आनुवंशिक संसाधनों के त्वरित विश्लेषण की सुविधा मिलने से प्रजनन की अवधि एवं लागत दोनों में कमी आएगी तथा टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलेगा। अंततः यह प्रयोगशाला बदलती जलवायु परिस्थितियों में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिक लचीली फसल किस्मों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
उद्घाटन समारोह में बीएयू के निदेशक अनुसंधान डॉ पीके सिंह और कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ डीके शाही भी उपस्थित थे।
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