ठगी के ल‍िए AI से तैयार किए जा रहे नकली बैंकिंग ऐप्स, ऐसे हुआ खुलासा

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  • सूरत साइबर क्राइम सेल ने 18 साल के आरोपी को किया गिरफ्तार

सूरत। सावधान रहें। अब नकली बैंकिंग ऐप्स AI से तैयार किए जा रहे हैं। गुजरात की सूरत सिटी साइबर क्राइम सेल ने देशव्यापी एआई-संचालित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। कानपुर के एक होटल से 18 वर्षीय कक्षा 11वीं ड्रॉपआउट रोहित वीरेंद्रसिंह शाक्य को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर ₹64.38 करोड़ की भारी-भरकम वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने वाले एक बड़े नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार होने का आरोप है।

ठगी का तरीका

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स की मदद से 121 फर्जी ऐप्स तैयार किए थे। इनमें मुख्य रूप से दो तरह के ऐप्स शामिल थे।

विक्टिम ऐप्स :  इन ऐप्स को असली जैसे दिखने के लिए डिजाइन किया गया था, ताकि यूज़र्स को धोखा देकर इन्हें डाउनलोड कराया जा सके। इनमें एसबीआई (SBI), पीएनबी (PNB), एक्सिस बैंक, आधार सेवाओं, पीएम-किसान योजना और बिगबास्केट जैसे प्रमुख बैंकों, सरकारी सेवाओं व निजी कंपनियों के नाम का इस्तेमाल किया गया था।

एडमिन ऐप्स : साइबर अपराधियों को पीड़ितों के फोन का पूरा रिमोट एक्सेस देने के लिए इन ऐप्स का इस्तेमाल होता था। इससे वे संवेदनशील डेटा, बैंकिंग क्रेडेंशियल्स और ओटीपी (OTP) आसानी से चुरा लेते थे।

मॉडल पर उपलब्ध

यह पूरा नेटवर्क टेलीग्राम के जरिए जामताड़ा, हरियाणा और राजस्थान के संगठित साइबर अपराध गिरोहों को सब्सक्रिप्शन मॉडल पर उपलब्ध कराया जा रहा था। इस मालवेयर के कारण देश भर में लगभग 2,928 डिवाइस पूरी तरह से कॉम्प्रोमाइज हुए। 54,094 फर्जी लेनदेन के जरिए ₹64.38 करोड़ की ठगी को अंजाम दिया गया।

ऐसे नेटवर्क की पोल

इस पूरे मामले की शुरुआत सूरत के एक स्थानीय निवासी की शिकायत से हुई, जिसे व्‍हाट्सऐप पर भेजे गए ‘PNB One.apk’ नाम के फर्जी ऐप के जरिए ₹5 लाख का चूना लगाया गया था।

सूरत साइबर क्राइम सेल द्वारा की गई फॉरेंसिक जांच में एक बड़े मालवेयर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का पता चला। जांचकर्ताओं ने पाया कि आरोपी द्वारा बनाए गए दुर्भावनापूर्ण ऐप्स देश भर के 21,672 से अधिक डिवाइसों में इंस्टॉल किए गए थे। इनमें फर्जी आरटीओ चालान, एसबीआई और पीएनबी ऐप्स के जरिए सबसे ज्यादा ठगी की गई थी।

जांच और पुलिस कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी रोहित के पास से दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।

जांच के प्रमुख बिंदु:

  • क्या देश के अन्य साइबर सिंडिकेट भी इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे थे?
  • इस नेटवर्क में आरोपी के साथ और कौन-कौन से सहयोगी शामिल थे?
  • पैसों के लेन-देन का पूरा मैपिंग करना और अन्य पीड़ितों की पहचान करना।

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