पटना। गुरुवार को बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर हुए चुनाव में एनडीए ने अपना दबदबा कायम रखते हुए क्लीन स्वीप कर लिया। नामांकन वापसी की समय सीमा खत्म होने के बाद सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए।
ऐसे में मतदान की जरूरत ही नहीं पड़ी और उम्मीदवारों की जीत पर सीधे मुहर लग गई। इस चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर बिहार की मौजूदा राजनीतिक ताकत का संकेत दिया है।
एनडीए गठबंधन ने अधिकांश सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि विपक्ष को सीमित सफलता से संतोष करना पड़ा।
विधान परिषद चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार और भाजपा समर्थित उम्मीदवार पवन सिंह की जीत को लेकर रही। दोनों की जीत पर निर्विरोध मुहर लगने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसकी खूब चर्चा हो रही है।
निशांत कुमार की जीत को जदयू के लिए अहम राजनीतिक संदेश माना जा रहा है, वहीं पवन सिंह की सफलता ने भी चुनावी परिणामों को खास बना दिया। दोनों नामों ने परिणाम आने के साथ ही सुर्खियां बटोर लीं।
निर्विरोध निर्वाचित 10 सदस्यों में जदयू और भाजपा का दबदबा साफ दिखाई दिया। जदयू के चार और भाजपा के चार उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। इसके अलावा लोजपा (रामविलास) के एक उम्मीदवार को भी सफलता मिली।
विपक्ष की ओर से केवल राजद का एक उम्मीदवार ही जीत हासिल कर सका। परिणामों ने स्पष्ट कर दिया कि विधानसभा के मौजूदा संख्या बल का असर विधान परिषद चुनाव में भी देखने को मिला।
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