- जीवन के किसी भी क्षेत्र में प्रगति के लिए अनुशासन और समयबद्धता जरूरी : डॉ दुबे
रांची। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एससी दुबे ने कहा है कि अनुशासन, शालीनता, बड़ों का सम्मान और समयबद्धता जीवन के किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है। भारतीय संस्कृति और संस्कार हमें बचपन से इसकी सीख देते हैं। विद्यार्थियों में यह भाव सुदृढ़ करने का दायित्व शिक्षकों का है। डॉ दुबे शनिवार को बीएयू के पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय के 65वें स्थापना दिवस को संबोधित कर रहे थे।
डॉ दुबे ने कहा कि किसी भी महाविद्यालय का स्थापना दिवस संस्थान का इतिहास एवं इसके संस्थापकों के योगदान को याद करने और संस्था की उपलब्धियों, चुनौतियों व कमियों के सिंहावलोकन करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह उन मूल्यों, मिशनों और दृष्टिकोण की याद दिलाता है, जिनसे उस संस्था की यात्रा शुरू हुई।
इसलिए स्थापना दिवस समारोह में कॉलेज परिवार के सभी सदस्यों- विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति होनी चाहिए, जिससे वे संस्था की उन्नति, समृद्धि और विकास के लिए सामूहिक रूप से संकल्प ले सकें। साथ ही, कहां कमियां रह गयीं, इसका आकलन कर सकें।
कुलपति ने कहा की पीजी पाठ्यक्रम सम्बन्धी अनुसंधान हो या वाह्य पोषित शोध, सबका उद्देश्य पशुपालकों की कठिनाइयां कम करना और उनका जीवन स्तर सुधारना होना चाहिए। उन्होंने सभी प्रयोशालाओं के आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए राशि की कमी नहीं है। संबंधित इकाइयों से ठोस प्रस्ताव आने चाहिए।
कुलपति ने कॉलेज के विद्यार्थियों और शिक्षकों से मौजूदा चुनौतियों को अवसरों में बदलने और संस्थान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की अपील की।
आयोजन के विशिष्ट अतिथि मेडिसिन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ डीके ठाकुर ने कहा कि पशुचिकित्सा विज्ञान पढ़नेवालों के लिए करियर में असीम संभावनाएं हैं, जिनमे पैसा, संतोष और सम्मान सभी मिलता है।
विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, फार्मा उद्योगों और अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों में शिक्षण एवं शोध कार्य, सरकारी विभागों में पशु चिकित्सा एवं प्रसार कार्य, टेलीमेडिसिन, डेयरी सेक्टर, पेट न्यूट्रीशन एंड वेलनेस, पेट प्रोडक्ट डेवलपमेंट, वन्यजीव चिकित्सा, पशु कल्याण, जैव विसिधता संरक्षण आदि क्षेत्रों में उनके लिए बहुत अवसर हैं।
पशुचिकित्सा संकाय के डीन डॉ एमके गुप्त ने स्वागत भाषण करते हुए कॉलेज की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। कहा कि यहां के पूर्ववर्ती विद्यार्थी शिक्षक, शोधार्थी, प्रशासक, नीतिनिर्माता और उद्यमी के रूप में पूरी दुनिया में फैले हुए हैं।
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