- शाम से सुबह तक हो रहा बालू का अवैध खनन और ढुलाई
गुमला। बालू माफिया नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और राज्य सरकार के आदेश को जिले के चैनपुर प्रखंड में ठेंगा दिखा रहे हैं। सरकार ने मानसून के दौरान नदियों से बालू उठाव पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद यहां शाम 5 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक शंख नदी से अवैध रूप से बालू का खनन, ढुलाई, तस्करी धड़ल्ले से जारी है। इस गोरखधंधे से सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।
सूत्रों के अनुसार बालू माफियाओं ने सरकारी तंत्र में अपनी गहरी पैठ बना ली है। कुछ सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से ही यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। माफिया इन कर्मियों को प्रति माह एक मोटी रकम पहुंचाते हैं, जिसके एवज में उन्हें सरकारी संपत्ति को लूटने की खुली छूट मिली हुई है। प्रतिबंध के बावजूद बालू माफिया 2500 रुपये प्रति ट्रैक्टर की दर से खुलेआम बालू बेच रहे हैं।
इस अवैध कारोबार का एक भयावह चेहरा आज प्रखंड मुख्यालय के खोपाटोली जामुन पेड़ के समीप देखने को मिला। छतरपुर शंख नदी से बालू लेकर चैनपुर की ओर जा रहा एक बिना नंबर प्लेट का तेज रफ्तार ट्रैक्टर, खोपाटोली सूर्या हॉस्पिटल के पास अनियंत्रित हो गया। ट्रैक्टर ने सड़क किनारे खड़ी एक टीवीएस मोटरसाइकिल को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे मोटरसाइकिल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
गनीमत यह रही कि बाइक चालक दिनेश जायसवाल उस समय गाड़ी पर नहीं थे, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई। श्री जायसवाल ने बताया कि वे अपने घर के काम के लिए राजमिस्त्री को लेने प्रेमनगर गए थे। उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल सड़क किनारे खड़ी की। मिस्त्री के घर में घुसने ही वाले थे कि बालू लदे ट्रैक्टर ने उनकी गाड़ी को रौंद दिया। उन्होंने कहा, “बाला-बाला बच गए, नहीं तो आज मेरी जान चली जाती।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन बालू लदे ट्रैक्टरों की रफ्तार इतनी तेज होती है कि इनके सामने आने वाला कोई भी व्यक्ति अपनी जान गंवा सकता है। ऐसा प्रतीत होता है कि इन माफियाओं के लिए इंसानी जान की कोई कीमत नहीं है।
एनजीटी ने पर्यावरण की रक्षा के लिए 10 जून से 15 अक्टूबर तक नदियों से बालू के उठाव पर रोक लगा रखी है। हालांकि चैनपुर में इन नियमों का कोई असर नहीं दिख रहा है।
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